सिंधी समाज की पहचान है लाडा और सूफी गीत

बीकानेर 3 जून 2018। भारतीय सिंधु सभा और सिंधी समाज की संस्थाओं द्वारा आयोजित बालसिंधी संस्कार शिविर का समापन रविवार को पवनपुरी में महापौर नारायण चोपड़ा के आतिथ्य में किया गया महापौर ने कहा कि हर समाज की अपनी एक विशिष्ट पहचान होती है और सिंधी समाज की पहचान इसकी मीठी बोली है और इस मीठी बोली में गाए जाने वाले पारंपरिक लाडा आदि गीत तथा सूफी गीत काफी पसंद किए जाते हैं
नारायण चोपड़ा ने मातृशक्ति से बच्चो से घर पर मातृ भाषा मे बात करने का आह्वान किया व अपने बचपन के संस्मरण सुनाए।
: टीकम पारवानी जी ने सुजागु सिंधी के नवीनतम अंक की प्रति मुख्य अतिथि को भेट की
मंचासीन हासानंद मंगवानी लालचंद तुलसियानी पार्षद झम्मन लाल लाल गजरा अमर लाल मंदिर अध्यक्ष हीरालाल रीझवानी पार्वती देवी आदि ने संस्कार शिविर में बच्चों के द्वारा उत्साह से भाग लिया जाने को सराहा अतिथि नारायण चोपड़ा का सिंधी परंपरा के अनुसार पखर श्री फल और फूल मालाओं से स्वागत केशव खत्री और मानसिंह मामनानी ने किया विजय एलानी व विनोद गिडवानी जी ने मुख्य अतिथि को मोमेंटो प्रदान किया
: मुख्य अतिथि ने शिशिका गुंजन गंगवानी शिक्षक अनिल डेम्बला का सम्मान किया
: मनुमल जी ने सिंधी भजन प्रस्तुत किये
: मंच संचालन करते हुए शिक्षिका गुंजन गंगवानी ने शिविर में प्रतिभागी सभी 40 बच्चों का परिचय कराया और उनमें उसे प्रस्तुति देने वाले 12 से अधिक बाल कलाकारों को महापौर चोपड़ा से मिलवाया
कार्यक्रम के अंत में श्याम आहूजा ने इस कार्यक्रम की उपयोगिता बताते हुए बताया कि जो बच्चे घर पर सिन्धी में बात नहीं करते थे वही बच्चे इस कैंप के माध्यम से 1 हफ्ते के अंदर सिंधी बोली में भजन कविताएं आदि सुना रहे हैं। शिविर में बच्चों को सिंधी बोली के अलावा बाल संस्कार व किशन सदारंगानी ने योग भी सिखाया। उन्होंने मुक्ता प्रसाद धोबी तलाई व श्री डूंगरगढ़ में होने वाले शिविरों की जानकारी दी।
कार्यक्रम में राजेश केसवानी,धर्मेंद्र बेलानी,राजकुमार वलीरामनी,: व श्रीमती अशोक खत्री माया दयाल आदि आदि मौजूद थे
_- मोहन थानवी
भाषा एवं सांस्कृतिक मंत्री भारतीय सिंधु सभा महानगर बीकानेर 9460 001 255

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