उदयपुर शहर का सीवर लाइन का पानी बीसलपुर में प्रवाहित किया जा रहा है

अजमेर। कांग्रेस का आरोप है कि उदयपुर शहर का मल-मूत्र एवं सीवर लाइन का पानी बीसलपुर में प्रवाहित किया जा रहा है दूषित पेयजल की सप्लाई अजमेर एवं जयपुर की जनता के लिए खतरनाक है। कांग्रेस का कहना है कि स्वच्छ भारत अभियान की आड़ में भाजपा सरकार द्वारा अजमेर एवं जयपुर की 20 लाख आबादी के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है कांग्रेस ने आशंका व्यक्त की कि यदि इस दूषित जल प्रवाह को नहीं रोका गया तो दोनों जिलों में भयंकर महामारी फैलेगी।
इस गंभीर एवं संवेदनशील मसले को लेकर शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय जैन के नेतृत्व में वरिष्ठ नेताओं का एक शिष्टमंडल बुधवार को जिला कलेक्टर आरती डोगरा से मिला और ज्ञापन प्रेषित किया। कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन के जरिए बताया कि वर्तमान में संपूर्ण अजमेर शहर, किशनगढ़, नसीराबाद, पुष्कर, मसूदा, ब्यावर एवं जयपुर शहर को पेयजल की आपूर्ति बीसलपुर बांध से की जा रही है किंतु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974 की सरकारी तंत्र द्वारा अनदेखी की जा कर सीवरेज युक्त पानी पीने के लिये अजमेर एवं जयपुर की जनता को मजबूर किया जा रहा है।
शहर कांग्रेस प्रवक्ता मुजफ्फर भारती ने बताया कि जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन में इस तथ्य को प्रमुखता से रखा गया कि उदयपुर शहर की मुख्यता मोतीमगरी स्कीम, दातामगरी, पंचवटी, सहेलियों की बाड़ी, न्यू फतेहपुरा, सरदारपुरा, कृष्णापुरा तथा निकटस्थ आवासीय क्षेत्रों के समस्त मल-मूत्र एवं सीवरेज अवशिष्ट को उदयपुर के सीवरेज सिस्टम के माध्यम से गुमानीया वाले नाले में प्रवाहित किया जा रहा है।
40 लाख आबादी के स्वास्थ्य खतरे में
ज्ञापन में बताया गया कि आश्चर्यचकित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि केंद्र सरकार की एक फ्लैगशिप अमृत योजना के अंतर्गत उदयपुर शहर के नगर नियोजकों द्वारा अजमेर एवं जयपुर की लगभग 40 लाख आबादी के स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया है, क्योंकि नगर नियोजन विभाग नगर निगम उदयपुर, नगर सुधार न्यास उदयपुर द्वारा तकनीकी रूप से सीवरेज की संपूर्ण दोषपूर्ण योजना तैयार की गई तथा क्रियान्वित भी की गई इसी अमृत योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपए खर्च किए जा कर उदयपुर के सीवरेज लाइनों को जबरन गुमानीया वाला नाले में जोड़ा गया।सरकारी विभागों के बड़े-बड़े अभियंताओं एवं नगर नियोजकों द्वारा इस बात का कतई ध्यान नहीं रखा गया कि यह गुमानीया वाला नाला अंततः अपना सारा सीवरेज एवं ठोस मल एवं मूत्र बीसलपुर डैम में प्रवाहित करता है।
सरकारी एवं प्रषासनिक तंत्र पर आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन का आरोप था कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते गुमानीया नाला आहड़ नदी में नगर नियोजकों द्वारा जोड़ दिया गया है यही आहड़ नदी उदयपुर सागर लेक वल्लभनगर लेक एवं मातृकुंडिया डैम के रास्ते से प्रवाहित होती हुई बीसलपुर डैम में समाहित हो जाती है। यह स्पष्ट है कि उदयपुर शहर के शौचालयों का ठोस मल एवं सीवरेज तथा औद्योगिक अवशिष्ट बीसलपुर बांध में प्रवाहित किए जा रहे हैं। लीपापोती करने के उद्देश्य से नगर नियोजकों द्वारा एकलिंगपुरा में केवल मात्र 20 एमएलडी की क्षमता वाले एक एसटीपी की स्थापना की गई किंतु वर्तमान में उदयपुर शहर एवं आसपास की बस्तियों से आने वाला मल-मूत्र, सीवरेज और औद्योगिक अवशिष्ट लगभग 30 एमएलडी प्रतिदिन प्रवाहित होता है इस प्रकार यह स्पष्ट है कि लगभग 10 एमएलडी सीवरेज एवं मानवीय मल बिना शुद्धिकरण के ही बीसलपुर में प्रतिदिन पहुंचा दी जाती है।
जहां सामान्य दिनों में अजमेर एवं जयपुर की जनता को 10 एमएलडी सीवरेज एवं मल-मूत्र प्रतिदिन पीने के लिए मजबूर किया जा रहा है वही यह स्थिति मानसून के सीजन में भयावह हो जाती है क्योंकि मानसून के मौसम में मल-मूत्र के साथ अमृत योजना के तहत बनाए गए खुले नालों से बरसाती पानी भी आहड़ नदी में प्रवाहित होता है जो औसतन 250 एमएलडी से 450 एमएलडी एक बार में होना संभाव्य है ऐसी स्थिति में 20 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी को अत्यधिक कम क्षमता होने के कारण बरसात के मौसम में अघोषित रूप से बंद कर दिया जाता है तथा गुमानीया वाले नाले का समस्त 30 एमएलडी मानवीय विष्ठा एवं सीवरेज को प्रतिदिन बीसलपुर में छोड़ दिया जाता है।
यह बिमारियां फैलेंगी
सरकारी एजेंसियों के माध्यम से समय-समय पर इस प्रदूषित पानी की प्रयोगशालाओं में जांच करवाई जाती रही है तथा जांच रिपोर्ट में ईकोलाई, लेप्टोइस्पेला, साल्मोनेला, प्रोटोजोआ, जैसे प्राणघातक बैक्टीरिया वायरस एवं माइक्रोब्स पाए गए। उक्त जीवन घातक बैक्टीरिया एवं वायरस की वजह से डायरिया मे नेंजाइटिस, लीवर संबंधी रोग पीलिया, किडनी फेल जैसी खतरनाक बीमारियां महामारी का रूप ले रही हैं।
कानून का उलंघन
जल संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974 की धारा 24 के अनुसार किसी भी व्यक्ति को किसी सार्वजनिक जलाशय अथवा नदी नालों में किसी भी प्रकार के जहरीले अथवा खतरनाक प्रदूषकों को प्रवाहित करने से निषेध करता है तथा ऐसा करने वाले व्यक्ति को डेढ़ वर्ष से लेकर 6 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। इससे भी अधिक अधिनियम की धारा 48 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि जल प्रदूषण अथवा उसमें जहरीले खतरनाक अपशिष्ट छोड़ने का कार्य यदि किसी सरकारी विभाग के द्वारा किया जाता है तो उस विभाग के विभागाध्यक्षों को अधिनियम के उल्लंघन का दोषी मानते हुए उसके विरुद्ध कारावास का दंड पारित किया जाएगा। कानून के उक्त प्रावधानों से स्पष्ट है कि अजमेर एवं जयपुर की 22 लाख आबादी को जहरीले एवं खतरनाक प्रदूषकों युक्त पानी पीने के लिए मजबूर करने वाले नगर निगम उदयपुर, नगर सुधार न्यास उदयपुर, नगर नियोजन विभाग उदयपुर के विभागाध्यक्ष इस प्रकरण में अधिनियम की धारा 48 के अंतर्गत स्पष्टया दोषी हैं।
कांग्रेस ने मांग की कि गुमानीया वाले नाले के माध्यम से प्रवाहित होने वाले मल एवं सीवरेज का मार्ग तत्काल बदलते हुए बीसलपुर बांध को प्रदूषण से बचाये जाने के ठोस उपाय किये जाऐं। एकलिंग पुरा की अपर्याप्त क्षमता वाले एसटीपी की क्षमता को आवश्यकता अनुसार तुरंत बढ़ाया जाना अपेक्षित है जिससे उदयपुर शहर की और से उदयसागर लेक, वल्लभ नगर लेक तथा मातृकुण्ड डेम से बिसलपुर बांध में प्रवाहित होने वाल अवशिष्ट युक्त पानी को रोका जा सके।
षिष्टमंडल में प्रदेष कांगेस सचिव महेन्द्र सिंह रलावता, पूर्व मंत्री ललित भाटी, नसीम अख्तर इंसाफ, पूर्व विधायक डा. श्री गोपाल बाहेती, प्रताप यादव, मुजफ्फर भारती शामिल थे।

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