किसके दबाव में अखिलेश सरकार

सोनभद्र जिले में डीएम की नियुक्ति का मामला गहराता जा रहा है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसी कौन सी वजह हैं जिसके चलते जिले में डीएम की नियुक्ति टलती जा रही है। अफसर डीएम बनने से कतरा रहे हैं या कोई ऐसा प्रभावशाली व्यक्ति है जो जिले में डीएम की तैनाती नहीं होने दे रहा है। आखिर वो कौन है जिसके दबाव में अखिलेश सरकार एक जिले का डीएम नियुक्ति करने का साहस नहीं जुटा पा रही।

ये ऐसे अनुत्तरित सवाल हैं, जिन पर सरकार की खामोशी सवालों के घेरे में हैं। इसकी वजह भी है। सूबे में सपा सरकार बनने के बाद जब सभी जिलों में नए डीएम तैनात किए गए तो सोनभद्र ही ऐसा जिला था, जहा मायावती सरकार के समय तैनात डीएम को हटा तो दिया, लेकिन करीब दो महीने तक कोई डीएम तैनात नहीं किया गया। इसकी जगह वहीं के जूनियर अधिकारियों को डीएम का चार्ज देकर काम चलाया जाता रहा।

दो माह बाद 22 मई को डीएम की तैनाती हुई भी तो सितंबर महीने में उन्हें फिर चलता कर दिया गया। तबसे आज तक वहा के सीडीओ को चार्ज देकर काम चलाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में जितने मुंह, उतनी बातें। कयास और निहितार्थ का दौर जारी है। कहा जा रहा है कि इस सरकार में एक प्रभावशाली अधिकारी की सोनभद्र को लेकर खासी दखल है। इस अधिकारी की दखलअंदाजी का ही नतीजा है कि वहा कोई डीएम तैनात नहीं हो पा रहा है। पहले उनकी कोशिश यह रही कि उनका कोई खास वहा का डीएम बन जाए, लेकिन उन्हें ऐसा कोई खास मिला नहीं तो उनकी रूचि वहीं के किसी जूनियर अधिकारी को डीएम का चार्ज दिलाने में ज्यादा हो गई। उसी का परिणाम है कि 22 सितंबर से वहा पीसीएस स्तर के सीडीओ के पास डीएम का चार्ज है। इससे पहले 30 मार्च से 22 मई तक भी वहा के डीएम का चार्ज काम चलाऊ व्यवस्था के तहत जिले के अधिकारियों के ही जिम्मे रहा। स्थिति यह है कि फिलवक्त वहा कोई डीएम बनना नहीं चाहता और अगर सुहास एलवाई जैसे लोग हामी भरते भी हैं तो उन्हें बहुत जल्दी ही हटना भी पड़ जाता है। स्थानीय विधायक रूबी प्रसाद कहती हैं, हमारे जिले में खनन माफिया बहुत प्रभावी हैं। उनका लखनऊ से गठजोड़ चलता है, इसलिए वो यहा कोई तेजतर्रार डीएम तैनात नहीं होने देते। हमने तथा कुछ अन्य जनप्रतिनिधियों से सीएम से मिलकर जिले में में डीएम तैनात करने की माग की थी तो सुहास एलवाई को डीएम बना दिया गया, लेकिन चंद दिनों में उन्हें प्रभावशाली लॉबी ने हटवा दिया। वैसे पूर्ववर्ती बसपा सरकार में यहा पंधारी यादव और वीवी पंत खासे लंबेसमय तक डीएम रहे हैं। पंधारी यादव का कार्यकाल आठ फरवरी 2009 से 2 जुलाई 11 तक रहा। इसके बाद वीवी पंत डीएम बने। उनका कार्यकाल 2 जुलाई 11 से 30 मार्च 2012 तक रहा। 15 मार्च को सूबे में अखिलेश सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक फेरबदल की प्रक्त्रिया शुरू हो गई। वीवी पंत को 30 मार्च को हटा दिया गया, लेकिन नए डीएम की तैनाती के बजाय कामचलाऊ व्यवस्था के तहत कार्यभार सौंप दिया गया। यह व्यवस्था 22 मई तक चली। 22 मई 12 को सुहास डीएम बने लेकिन 22 सितम्बर को उन्हें हटा दिया गया। नियुक्ति विभाग का कहना है कि सोनभद्र में डीएम की नियुक्ति न हो पाना सामान्य बात है। किसी जिले के लिए यदि बेहतर डीएम नहीं मिल पा रहा है तो जिले के अन्य अधिकारी को अतिरिक्त कार्यभार सौंपना कोई विशेष बात नहीं हैं। अत: इसके निहितार्थ निकालने की जरूरत नहीं है।

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