आयुर्वेद निरापद चिकित्सा पद्धति

केकड़ी 30 जनवरी।
भारत विकास परिषद केकड़ी एवं आयुर्वेद विभाग राजस्थान विशाल निशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा का पांच दिवसीय कैम्प कटारिया विश्राम शाला अजमेरी गेट पर 27 जनवरी से नियमित चल रहा है
इस कैम्प के प्रभारी सुरेश शर्मा ने बताया कि इस कैम्प में कपिंग,लकवा,कील-आटण,जोड़ो के दर्द और साइटिका आदि का निशुल्क चिकित्सा की जा रही है

आज 27 जनवरी से 29 जनवरी तक 285 मरीजो की जांच व रजिस्ट्रेशन किया और साइटिका के 9 का अग्निकर्म से उपचार किया , कील-आटन 50 निकाली गयी ,कटी भस्ति 4 अन्य घुटनो ,जोड़ो,कमर दर्द के 210 मरीजो का कपिंग थैरेपी व भांप स्वेदन द्वारा चिकित्सा की गई

भारत विकास परिषद के अध्यक्ष किशन सोनी ने बताया कि शिविर में आयुर्वेद चिकित्सा डॉ अंजू बाला चौहान ,इंदु बाला व सुधाकर मिश्र व डॉ नवनीत कटारे और उनकी टीम ने रोगियों के कील आन्टन,सहित अन्य रोगों का निदान किया,इसमे आयुर्वेदा न्यूरो थेरेपी के प्रति लोगों में काफी उत्सुकता नजर आयी,इस बारे में डॉ अंजुबाला कटारे ने बताया कि आयुर्वेदा न्यूरो थेरेपी भी आयुर्वेद के सिद्धांतों पर काम करती है आयुर्वेद के समान ही यह भी रोगों के “कारण” की चिकित्सा है,इसके द्वारा रोग के कारण को खत्म करके रोगी को पूर्णतः रोग मुक्त किया जाता है,इससे सामान्य व्यक्तियों के स्वास्थ्य की भी रक्षा होती है क्योंकि आयुर्वेद का सिद्धांत है-स्वास्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम,आतुरस्य विकार प्रशनम चः,अतः यह थेरेपी हार्मोनल लेवल पर जाकर अपना कार्य करती है,इसलिए स्वस्थ रोगी को स्वस्थ रहने में यह काफी कारगर है क्योंकि आजकी आधुनिक जीवन शेली में हार्मोनल इमबेलेन्स आज एक आम समस्या होगई है इस इमबेलेन्स को ठीक करके व्यक्ति को स्वस्थ रखा जा सकता है,स्त्रियों में तो यह समस्या विकराल रूप ले चुकी है उनके लिए आयुर्वेदा न्यूरो थेरेपी एक सही समाधान है,आयुर्वेदा न्यूरो थेरेपी से हम स्पाइनल फ्लूड की एनर्जी पर कार्य करते है जिससे शरीर मे मेटाबोलिज्म की क्रियाएं तेज होकर आक्सीजन की शरीर मे सप्लाई तेज हो जाने से शरीर मे कोशिका निर्माण की प्रक्रिया पुनः शुरू होती है जिसके कारण शरीर के डेमेज आर्गन पुनः अपनी कार्यक्षमता प्राप्त करते है और शरीर स्वस्थ होता है इस थेरेपी से शरीर के आर्गन ओर सिस्टम की कार्यप्रणाली बेहतर होती है जिससे रोगों को नाश होता है और रोगी स्वस्थ हो जाता है,आयुर्वेदा न्यूरो थेरेपी मुख्य रूप से सुषुम्ना नाड़ी की शक्ति को जागृत कर सवचको की ऊर्जा को शरीर मे प्रवाहित कर शरीर मे रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ा देती है जिससे रोगी रोगमुक्त हो जाता है,हां आयुर्वेद में समय जरूर लगता है इसलिए लोग एलोपैथी की तरफ ही देखते है मेरा आमजन से यही आव्हान है कि वे अपने परिवार को सम्पूर्ण स्वस्थ रखने हेतु आयुर्वेद को अपने जीवन का अंग बनाये। उपचार के दौरान कम्पाउंडर राजेश सेठी ,शंकर लाल,सुमित्रा पारीक,सविता,पूनम शेखावत,लक्ष्मी व राजेन्द्र चौधरी, पूर्ण मनोयोग से सेवा कर रहे है,साथ ही भीलवाड़ा के सेवानिवृत्त डॉ ओमप्रकाश शर्मा साइटिका स्पेशलिस्ट भी शिविर में पांचो दिन सेवा दे रहे है।आज शिविर का वरिष्ठ पत्रकार व समाज सेवी संजय कटारिया ने अवलोकन किया व इस पद्धति से इलाज को बढ़ावा देने के लिए भारत विकास परिषद की सराहना की,
शिविर में परिषद सदस्य राम नरेश ,विमल कोठारी,बहादुर सिंह शक्तावत,भगवान माहेश्वरी,महेश छापरवाल,मुरारी एरन ,शिव बियानी,अशोक सोनी,पुरषोत्तम काबरा,गोविंद गर्ग अनिल दत्त शर्मा,राजेश विजय,आभा बेली,राधा माहेश्वरी,अक्षय बाला कोठारी,अंजू विजय,संगीता विजय इत्यादि सदस्य नियमित सेवा दे रहे है ।

मौसमी बीमारी व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए दिनांक 27 से नियमित प्रातः 11 बजे से 1 बजे तक काढ़ा पिलाया जा रहा है जो 31 जनवरी तक प्रतिदिन वितरण किया जाएगा अब तक 3200 से ज्यादा लोगो को वितरित किया जा चुका है।

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