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तीर्थराज पुष्कर की धरा पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने अपनी जाजम बिछाई है। हिंदुत्व की जीत से सरोबोर, राष्ट्रवाद को अपने अनुकूल परिभाषा में बदल चुके संघ का यह स्वर्णकाल चल रहा है। उसकी हर इच्छा पूरी हो रही है, सपने साकार होते दिख रहे हैं। 1995 में अपनी स्थापना से लेकर दशकों तक संघर्ष, सहनशील, महत्वकांक्षी और अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर धीरे धीरे आगे बढऩे वाला संघ अब अपनी मंजिल से दूर नहीं है। सत्ता की डोर उसके हाथ में आ चुकी है, लोकसभा में भारी बहुमत है, राज्यसभा में आवश्यक सीटें पा चुका है। राष्ट्रपति अपना है प्रधानमंत्री अपना है, हर संवैधानिक विभागों, सरकारी उपक्रमों, गैर सरकारी पदों पर अपने आदमी बैठ चुके है। विपक्ष आईसीयू में है। इससे अच्छा अवसर और कार्यकाल अब और नहीं मिल सकता। कुछ सालों पूर्व अपने संघर्ष में हारा थका संघ उदारता, नम्रता का भाव दिखा रहा था, आज उसका चेहरा अपनी विजय से गौरन्वित होकर चमक रहा है। अब अंतिम इच्छा राममंदिर का निर्माण शुरु होने की रह गई है जो तमाम व्यवस्थाओं के बीच देर सवेर पूरी हो ही जाएगी। संघ के तीन एजेंडें और एक सपना था। राममंदिर निर्माण, कश्मीर में धारा 370 हटाना, समान नागरिकता कानून लागू करवाना और सबसे बड़ा सपना देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करवाना रहा है। इनमें से धारा 370 हटा दी गई है, तीन तलाक कानून लागूकर, मुस्लिम पर्सनल लॉ में सेंघ लगाकर, संघ समान नागरिकता कानून की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। न्यायपालिका में घुसपैठ हो चुकी है इसलिए राममंदिर निर्माण दूर नहीं और फिर जहाँ उसके पास विशाल प्रचार तंत्र है जिसके सहारे हिंदू राष्ट्र हो जाने की घोषणा का कोई मतलब भी नहीं रह जाएगा। तीर्थराज पुष्कर में ब्रहमा जी का एकमात्र मंदिर है जिसके बारे में पौराणिक कथा है कि ब्रहमा ने धरती पर अपना मंदिर कहाँ बने इसके लिए अपने पुष्प कमल की एक पांखुड़ी धरती पर फेंकी और यह पांखुड़ी पुष्कर में जाकर गिरी जहाँ आज ब्रहमा मंदिर है। संघ उस ब्रहमा को धन्यवाद करने और आशीर्वाद लेने पुष्करधरा पर अपनी अखिल भारतीय समन्वय समिति की बैठक कर रहा है। सत्ता में बैठे लोग और संघ के पदाधिकारी की समन्वय बैठक में औपचारिक रुप से मुद्दे कोई भी हों लेकिन तीर्थ राज पुष्कर से संघ की घोषणा हिंदुत्व का विजय घोष होगा।
– मुजफ्फर अली