नई दिल्ली, अगस्त, 2026- इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी (आईएसपीपी) ने चेष्ठा कोचर फाउंडेशन की साझीदारी में पहले चेष्ठा कोचर नज अवार्ड्स 2026 की मेजबानी की। पूरे भारत में दुनिया की वास्तविक लोक नीति और घटना से जुड़ी चुनौतियां से निपटने वाले व्यवहार विज्ञान के अनूठे प्रयोगों का जश्न मनाने के लिए नीति निर्माता, व्यवहार वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, सामाजिक उद्यमी और जन नेता इस आयोजन में शामिल हुए।
ये अवार्ड्स चेष्ठा कोचर के जीवन और उनकी विरासत का सम्मान करते हैं। वह लोक नीति की एक समर्पित पेशेवर थीं जो बदलाव लाने के लिए व्यवहार से जुड़ी समझ और सबूतों पर आधारित नीति बनाने के काम के लिए प्रतिबद्ध थीं। इस वार्षिक पहल के जरिए आईएसपीपी और चेष्ठा कोचर फाउंडेशन का उद्देश्य व्यवहार में बदलाव लाने वाले ऐसे उपायों को पहचानना और प्रोत्साहित करना है जो पैमाने पर लागू किए जा सकें, मनोविज्ञान और अर्थशास्त्र पर आधारित हों, निर्णय करने की प्रक्रिया को सरल बनाएं, नागरिकों के परिणामों में सुधार करें और व्यक्तिगत पसंद को संरक्षित करें।
इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉक्टर अशोक लाहिरी, जबकि विशिष्ट अतिथियों के तौर पर पूर्व चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और सेशेल्स में भारत के पूर्व उच्चायुक्त जनरल दलबीर सिंह सुहाग (सेवानिवृत्त) एवं जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ बिहैवियरल साइंसेज की डीन प्रोफेसर (डॉक्टर) पुलकित खन्ना शामिल हुए।
नीति निर्माण में व्यवहार विज्ञान की भूमिका रेखांकित करते हुए डॉक्टर अशोक लाहिरी ने कहा, “लोक नीति के मामले में भारत का अगला कदम सिर्फ बेहतर योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि ऐसी योजनाएं बनाना है जो इस बात पर आधारित हो कि नागरिक असल में व्यवहार कैसा करते हैं। नजेज़ लोगों की आजादी छीने बगैर विकल्पों को पेश करने के तरीके में मामूली बदलाव करके इस अंतर को पाटने में मदद कर सकते हैं।” उन्होंने व्यवहार संबंधी ऑडिट, फील्ड प्रयोगों और डिजिटल ढांचे की क्षमता पर जोर दिया। इनके जरिए असरदार उपायों को परखा, मापा और तेजी से बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है जिससे गवर्नेंस को अधिक नागरिक केंद्रित, परिणाम उन्मुखी और आर्थिक रूप से कुशल बनाया जा सके।
चेष्ठा की विरासत के बारे में जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने उन्हें “ईश्वर की संतान, एक अद्भुत बच्ची और एक फरिश्ता” के तौर पर याद किया जिनकी ऊर्जा, अपनापन और बुद्धिमत्ता ने जहां भी उन्होंने पढ़ाई की या काम किया, वहां अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने सिर्फ 33 साल में जो हासिल किया, वह हममें से ज्यादातर लोग पूरी जिंदगी में भी हासिल नहीं कर पाते। उन्होंने अपने पीछे एक विरासत छोड़ी है। यद्यपि चेष्ठा शारीरिक रूप से उपस्थित ना हों, “वह हमारे दिलों में हैं।”
व्यवहार विज्ञान के मानवीय आयामों पर जोर देते हुए प्रोफेसर (डॉक्टर) पुलकित खन्ना ने कहा, “व्यवहार बदलने की कोशिश करने से पहले, कृपया उसे समझने की थोड़ी और कोशिश करें। उन्होंने कहा कि एक अच्छा नज यानी किसी को धीरे से सही दिशा में प्रेरित करना, जरूरी नहीं कि सबसे चतुर या सबसे होशियार हो, बल्कि वह ऐसा होना चाहिए जो सबूतों के साथ सहानुभूति पर भी आधारित हो।”
आगे की बात करते हुए खन्ना ने कहा कि व्यवहार विज्ञान का भविष्य “सबूत, सहानुभूति, नैतिकता और असर” को एक साथ लाने में है। साथ ही यह भी याद रखना जरूरी है कि हर डेटा प्वाइंट के पीछे एक इंसान होता है।
शाम की शुरुआत आईएसपीपी की चेयरपर्सन और सह संस्थापक लुइस मिरांडा के स्वागत भाषण से हुई। इसके बाद सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉक्टर एसपी कोचर चेष्ठा के जीवन, मूल्यों और विजन पर बात करते हुए एक विशेष संबोधन दिया।
नजिंग का भविष्य “दि फ्यूचर ऑफ नजिंगः बिहैवियरल इकोनॉमिक्स एंड पब्लिक इंपैक्ट इन इंडिया” शीर्षक से एक परिचर्चा सत्र का आयोजन किया गया जिसके सूत्रधार जेएनयू में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर डॉक्टर सुजॉय चक्रवर्ती रहे। इस परिचर्चा में चीफ एवांजलिस्ट, फ्रैक्टल एनालिटिक्स एवं फाइनलमाइल कंसल्टिंग की चेयरपर्सन बिजु डॉमिनिक, शीएटवर्क डॉट कॉम की संस्थापक और ब्रिक्स सीसीआई वुमेन्स वर्टिकल की अध्यक्ष रूबी सिन्हा और वर्क विथ डिग्निटी फाउंडेशन के सीईओ रामा शंकर पांडेय शामिल हुए।
इस परिचर्चा में भारत में सर्विस डिलीवरी, नागरिकों की भागीदारी और प्रशासनिक दक्षता को आधुनिक बनाने में व्यवहार संबंधी संरचना की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की गई।
पुरस्कार विजेताओं के बीच जश्न मनाया गया– चेष्ठा कोचर नज अवार्ड्स 2026 के तहत तीन प्रभावशाली पहल की पहचान की गई जिसमें प्रत्येक पहल को उनके सतत नवप्रवर्तन में सहयोग के लिए 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया गया।
थिंकजोन जिसका प्रतिनिधित्व बिनायक आचार्य ने कियाः प्रकाशकः ओड़िशा में सरकार द्वारा संचालित एक डिजिटल अभिभावक सहभागिता कार्यक्रम जो ग्रामीण, कम आय वाले अभिभावकों को व्हाट्सएप, एसएमएस और स्वचालित कॉल के माध्यम से पाठ्यक्रम के अनुरूप सूक्ष्म शिक्षण गतिविधियां प्रदान करता है ताकि बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को बढ़ावा दिया जा सके।
नम्माकासा, जिसका प्रतिनिधित्व ज्योतिष वीएम ने कियाः बेंगलुरु में एक आसान और सार्वजनिक सिविक टेक प्लेटफॉर्म जो सिविक रिपोर्टिंग के तरीके को निजी से बदलकर सार्वजनिक जवाबदेही वाला बनाता है। यह नागरिकों को बिना कोई ऐप डाउनलोड किए या एकाउंट बनाए 30 सेकेंट से भी कम समय में बिना उठाए गए कचरे की रिपोर्ट करने की सुविधा देता है।
प्रोजेक्ट मुंबई जिसका प्रतिनिधित्व शिशिर जोशी ने कियाः प्लास्टिक रिसाइक्लोथॉनः महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर सामुदायिक रिसाइक्लिंग अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान प्लास्टिक इकट्ठा करने के लिए साफ और तय कार्यक्रम बनाकर इरादे और अमल के बीच अंतर को कम करता है और रिसाइकल किए गए कचरे को पार्क की बेंच और कूड़ेदान जैसी सार्वजनिक सुविधाओं में तब्दील करता है।
ड्राइविंग दि फ्यूचर पॉलिसी– चेष्ठा कोचर नज अवार्ड्स का मकसद सबूतों पर आधारित और नागरिकों पर केंद्रित नवप्रवर्तन को बढ़ावा देकर देशभर में गवर्नेंस, लोक नीति और सामाजिक विकास में व्यवहार विज्ञान को मुख्य धारा में लाने के लिए एक उत्प्रेरक के तौर पर काम करना है। साथ ही यह चेष्ठा कोचर की सोच समझकर किए गए और सबूतों पर आधारित जनसेवा के काम को आगे बढ़ाता है।