खुला पत्र
माननीय मुख्यमंत्री महोदय
राजस्थान सरकार जयपुर
महोदय,
राजस्थान राज्य में कोविड-19 निष्चित ही एक अभिषाप है तथा इस काल को राज्य के नागरिको व कर्मचारियो ने एक तपस्या के रूप में लिया है राज्य के शासन-प्रषासन द्वारा नागरिको की हर सुविधा को ध्यान में रखते हुये हर परमावष्यक कदम उठाये है और आमजन को इस महामारी से बचाने में राज्य के सभी कर्मचारियो ने कमर कस जी तोड मेहनत की है तथा निरन्तरता में है और उसी का परिणाम है कि राज्य में महामारी नियंत्रित स्थिति में है इस हेतु नीति के साथ कर्मचारियो की सहभागिता को नकारा नहीं जा सकता ।
राज्य का साढे सात लाख कर्मचारी राज्य सरकार के हर निणर्य के साथ प्रतिबद्धता से साथ खडा है तथा राज्य के वित्तीय हालात व राज्य के मुखिया के आदेष पर अपने वेतन दान से राज्य की आर्थिक हालात में सहायता की है कर्मचारियो ने आगे बढकर सहयोग किया तथा आपात स्थिति में सरकार का दामन नहीं छोडा और वित्तीय हालतो को नियत्रण व काबू करने में राज्य सरकार को पर्याप्त समय दिया कर्मचारियो के निरन्तर वेतन (मूलवेतन,महगाई भत्ते,मकान किराये, समर्पित उपा0 अवकाष में) कटौती की मानसिकता का परित्याग करना होगा कर्मचारी समाज का अभिन्न अंग है तथा उनके आय का स्त्रोत केवल वेतन के अतिरिक्त कुछ नहीं है ऐसे में उसके वेतन में कटौती को जायज नहीं कहा जा सकता कर्मचारी अपने परिवार का पोषक है तथा उसके साथ सामाजिक जिम्मेदारियो का सतत निर्वह्न है ।
राज्य के कार्मिको ने 1 से 5 दिवस के वेतन दान सहित वेतन का 30 से 50 प्रतिषत हिस्सा स्थगित को एकाएक आपदा सहायता समझ स्वीकार किया । राज्य के आम नागरिको व भामाषाहो ने बढ चढ कर राज्य को वित्तीय दान किया व आम जन की परेषानियो को कम करने व कोई नागरिक भूखा ना रहे इस मंत्र पर निरन्तर कार्य किया है तथा गरीब,दीन,वंचितो, व असमर्थको को भोजन व आवष्यक सुविधा मुहैया कराई है ।
यक्ष प्रष्न यह है कि हमारे वित्तीय प्रबंधन स्वंय के आर्थिक संसाधनो से मजबूत व पूरे किये जाने चाहिये ना कि दान व सहयोग पर आधारित होना चाहिये साथ ही अर्थ प्रबंधन के साथ आपदा की समीक्षा में आय-व्यय की समीक्षा कर प्रबंधन किया जाना चाहिये इस हेतु हमारी नीतियो में आवष्यक परिवर्तन भी करना अपेक्षित है । हालाकि अभी नया वित्तीय वर्ष 2020-21 प्रारम्भ ही हुआ तथा इस वर्ष का कोई खास व्यय नहीं हुआ है सभी मदो में प्रर्याप्त राषि निष्चित है तो फिर आर्थिक हालात कैसे विकटता में आ गये इस पर भी मंथन किया जाना चाहिये । राज्य सरकार के मुखिया सहित प्रषासनिक अघिकारियो का दायित्व बनाता है कि राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर भविष्य को संरक्षित करें ।
आपदा के समय राज्य के अर्थ प्रबंधन हेतु उदाहरणार्थ परिणामी कुछ सुझाव चिन्तन
हेतु प्रेेषित है ।
1. षासन-प्रषासन के व्यय में कमी किया जाना ।
2. राज्य की विधायिका सदस्यो के भत्तो को कम किया जाना ।
3. कर्मचारियो के भत्ते यथाः धुलाई भत्ता, केषियर भत्ता, स्टेषनरी भत्ता, वर्दी भत्ता, हार्ड डूयूटी भत्ता, मैस भत्ता, नोन प्रेक्टिस भत्ता इत्यादि को कम किया जाना ।
4. कर्मचारियो द्वारा वर्षो से मांग की जाती रही है कि 01.04.2004 के बाद नियुक्त कर्मचारियो
को पुरानी पंेषन में षामिल किया जाकर नवीन पंेषन योजना को बंद किया जावे ।
निष्चित यह मांग जायज है इस मांग के अमल में लाने से एक तो कर्मचारियो का भविष्य
सुरक्षित होकर शेयर बाजार में राषि डूबने का भय समाप्त होगा वही राज्यनिधि भी संरक्षित
रहेगी और प्रावधायी निधि में वेतन से जमा अरबो रूपयो की राषि हर समय राज्य सरकार
के पास उपलब्ध होगी । देष के कई राज्यो ने इसे अपनाया है ।
5. आपदा काल में राज्य की आबकारी नीति में परिवर्तन कर आय के संसाधनो को नीति युक्त उपलब्धता से राजस्व का अर्जन किया जाना ।
6. मकान-जमीन, वाहन लाईसेंस निर्धारण शुल्क की समीक्षा कर राजस्व बढाने हेतु पुनः निर्धारण किया जाना चाहिये ।
7. आम जन कल्याण योजनाओ की समीक्षा कर किये जाने वाले व्यय को न्यून किया जाना
8. विभिन्न विभागो में निषुल्क योजना पर पुर्न विचार किया जाना व अनावष्यक उपहारो,को बंद किया जाना ।
9. समस्त प्रकार की बकाया लीज राषि को वसूलने पर आवष्यक कदम उठाया जाना व विभीन्न प्रकार की लीज दरो को संषोधित किया जाना ।
10. इस प्रकार से प्रत्येक विभागानुसार अनावष्यक व्ययो को समाप्त कर करो को संषोधित कर आय के स्त्रोत से वित्तीय प्रबंधन परिमाणिक है । किन्तु करारोपण में जिसका सीधा प्रभाव आमजन गरीब अमीर पर हो उसमें कमी भी आवष्यक है जैसे पैट्रोल, स्टेट हाई वे टोल टेक्स सहित अन्य वाणिज्यिक कर ।
रणधीर ंिसंह कच्छावा
प्रदेष महामंत्री