प्राइवेट स्कूल v/s फीस :रास्ता नहीं निकला तो कई हजार अध्यापक अध्यापिकाओं के परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट*
*फीस नहीं आने से निजी स्कूल स्टाफ को समय पर नहीं मिल रहा वेतन, दोनों तरफ से पहल करनी चाहिए*
अजमेर / अनलॉक 2 में जहां अनेक व्यापारिक संस्थानों , कंपनियों आदि में काम शुरू होने के कारण अर्थ व्यवस्था पटरी पर आने लगी है परंतु प्राइवेट स्कूलों की व्यवस्था बनने के बजाए बिगड़ने लगी है। कारण यह है कि सरकार ने फीस को स्थगित कर रखा है और स्कूलों की ऑनलाइन क्लासें जारी है। फीस स्थगित और ऑनलाइन पढ़ाई के बीच सबसे अधिक परेशानी उन अध्यापकों को हो रही है जो इन स्कूलों में लगातार पढ़ा रहे है व वेतन के लाले पड़े है।
स्कूल संचालकों की सरकार से मांग है कि इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि न सिर्फ बच्चों का भविष्य बेहतर हो सके बल्कि हजारों अध्यापकों का परिवार चल सके। स्कूलों को चलाने के लिए फीस लिया जाना आवश्यक है। दूसरी ओर कुछ अविभावक अभी भी फीस नहीं देने के मूड में है।
*अभिभावकों का पक्ष*
हालांकि ज्यादातर अविभावक इस बात को मान रहे है कि वर्तमान परिस्थतियों में यदि स्कूलों को फीस नहीं दी गई तो भविष्य में शिक्षा पर बहुत ही खराब असर पड़ सकता है क्योंकि यह न सिर्फ बच्चों से जुड़ा मामला है बल्कि हजारों उन परिवारों की पीड़ा है जो इन स्कूलों में पढ़ाकर अपने बच्चों का पालन पोषण कर रहे है। इसके बाद भी अनेक अविभावक अपनी परिस्थितियों की बात करते हुए फीस नहीं देने के पक्ष में है। उनका कहना है कि जब पढ़ाई नहीं तो फीस भी नहीं। वे ऑनलाइन पढ़ाई को पर्याप्त नहीं मानते है।
*स्कूल संचालकों का पक्ष*
संचालकों का मानना है कि यह बात सच है कि क्लासरूम में जो पढ़ाई करवाई जा सकती है वह ऑनलाइन नहीं हो सकती परंतु वर्तमान परिस्थितियों में जब क्लासरूम पर रोक है तो ऑनलाइन के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए। इस पढ़ाई में उनका खर्चा अधिक बैठता है व वे पहले से बेहतर देने का प्रयास कर रहे है।
उनका कहना है कि ज्यादातर दूसरे संस्थानों ने इस तरह की व्यवस्था कर दी है कि जो फीस जमा करवाएगा उसे ही ऑनलाइन का लिंक मिलेगा परंतु स्कूलों ने अपने बच्चों के लिए ऐसा नहीं किया है। दूसरी बात यह है कि जो अध्यापक इन्हीं के भरोसे अपना परिवार चला रहे है। उनके पास रोजी रोटी का संकट खड़ा होने लगा है। इसलिए अविभावकों को अपने बच्चों के भविष्य व हजारों परिवारों की चिंता भी करनी चाहिए।
*कई हजार परिवारों का पोषण करना है शहर के लोगों को*
अजमेर जिले में कई छोटे बड़े निजी रजिस्टर्ड स्कूल हैं। कई स्कूलों में पचास से अधिक का स्टाफ भी है तो कहीं पर दस से पंद्रह का भी इस प्रकार एक स्कूल में औसतन 30 -32 का स्टाफ माना जाए तो जिले में करीब कई हजार लोगों जिनमे स्कूल स्टाफ कलर्क बस ड्राइवर्स ,चपरासी ,माली और अन्य सभी की सीधे तौर पर आजीविका जुड़ी हुई है। कोरोना शुरू होने के बाद स्कूल स्टाफ को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है।
*सरकार ने फीस को स्थगित किया है न कि माफ*
सरकारी आदेश में यह नहीं कहा गया कि स्कूलों की फीस जमा नहीं करानी है, केवल कुछ दिन के लिए इसे स्थगित करने की बात कही है। स्कूल संचालकों का कहना है कि फीस के लिए किसी अभिभावक पर दबाव नहीं डाला है। अगर उसके पास अभी फीस नहीं है तो वह अंडर टेकिंग देकर कह सकता है कि जब उसका वेतन आएगा, फीस जमा करा देंगे। ज्यादातर स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा अन्य किसी तरह के दूसरे चार्ज नहीं ले रहे हैं। इसलिए परिवारों को बचाने के लिए सभी को आगे आना चाहिये।।इस बाबत एक पत्र राजस्थान के मुख्यमंत्री एव शिक्षा मंत्री को लिखा गया है।
पत्र भेजने वालो में शैलेश गर्ग संस्थापक, अनिल खंडेलवाल अध्यक्ष,एक पहल सेवा की ओर से अजमेर…Mobile 8290270361.or 9983177000