
प्रदेश की स्कूलों में 60 लाख बच्चों को दूध पिलाने वाली अन्नपूर्णा दूध योजना को बंद करने के मामले में पूर्व शिक्षा मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता वासुदेव देवनानी ने कांग्रेस सरकार पर विद्यार्थियों के प्रति असंवेदशीलता बरतने का आरोप झड़ा है। देवनानी ने कहा कि दूध में मिलावट की आड़ लेकर राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों के स्वास्थ्य व पोषण के लिए दिये जा रहे दूध को नजरअंदाज करके इस महत्वपूर्ण योजना को बंद कर रही है जबकि इसके पिछे वास्तविक कारण सरकार का आर्थिक दिवालियापन है। उन्होंने कहा कि दूध में मिलावट की जांच एवं शुद्ध दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार आवश्यक प्रबंध कर सकती थी परन्तु अपने आर्थिक प्रबंधन में विफल कांगेस सरकार बच्चों के मुंह से दूध छीनकर उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जा रही है।
देवनानी ने कहा कि कक्षा पहली से 8वीं तक के बच्चे शारीरिक रूप से हष्ट-पुष्ट और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे इसके लिए सवा साल पहले गत भाजपा सरकार ने अन्नपूर्णा दूध योजना प्रारंभ की। प्रारंभ में सप्ताह के तीन दिन दूध वितरित किया गया जिसे योजना की महत्ता, बच्चों की आवश्यकता और अभिभावकों की मांग को देखते हुए सप्ताहभर कर दिया गया। प्रतिदिन दूध मिलने से कुपोषित बच्चों को पोषण मिला जबकि अन्य बच्चों का भी स्वास्थ्य उत्तम हुआ। लेकिन प्रदेश का यह दुर्भाग्य ही है कि साठ लाख बच्चों के स्वास्थ्य से जुडी ऐसी महत्वपूर्ण योजना पर भी कांग्रेस सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन का ग्रहण लग गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार दूध में मिलावट को बहाना बताकर योजना को बंद कर रही है तो क्या हमारे घरों में आने वाले दूध में भी यदि मिलावट की आशंका हो तो घरों पर भी दूध बन्द कर देना चाहिए या दूध की जांच कराकर बिना मिलावट के शुद्ध दूध की व्यवस्था करनी चाहिए। देवनानी ने कहा कि मिलावट तो एक बहाना है, असल में सरकार की नीयत में ही खोट नजर आ रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसा पहली बार कर रही है ऐसा भी नहीं है। पिछले दो साल में कांग्रेस सरकार गत भाजपा सरकार द्वारा संचालित ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ दर्जनों योजनाओं पर ताले लगा चुकी है और उन्हीं योजनाओं का केवल नाम बदल पुनःचालू कर जनता की झूठी वाहवाही लूटने का कार्य किया है। अन्नपूर्णा दूध योजना के साथ भी कुछ ऐसा ही वाक्या होने वाला है। सरकार बच्चों के मुंह से दूध छीनकर अन्य सामग्री बांटने की योजना बना रही है जो अव्यवहारिक है। सरकार को अगर बच्चों के लिए कुछ अच्छा ही करना है तो दूध वितरण को चालू रखते हुए अन्य खाद्य सामग्री का वितरण प्रारंभ करने की योजना बनाना चाहिए। दूध नहीं देकर उसकी जगह अन्य सामग्री देना न्यायसंगत नहीं है। देवनानी ने सरकार से मांग की है कि इस योजना को बंद करने के निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों के स्वास्थ्य व पोषण के लिए आवश्यक दूध की महत्ता को ध्यान में रखते हुए अन्नपूर्णा दूध योजना चालू रखा जाए।