रात के बाद की नई प्रभात

देवी नागरानी
रात के बाद की नई प्रभात
मुस्कुराकर कह रही

नए वर्ष का आग़ाज़ है
नए सूर्य का भी ताप है
नए दिन की नयी किरण
मुस्कुराकर कह रही है
तुम भी तो नज़रें उठाकर
कुछ नज़ारे देख लो
शाम तक का ही समय है
फिर तो मैं भी अस्त होकर
कल को फिर से
“आज” बनकर आऊँगा

देवी नागरानी

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