
प्रदेश की गौशालाओं को राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 के द्वितीय चरण की अनुदान राशि अभी तक नहीं दी गई है तथा प्रथम चरण के तहत भी जो अनुदान राशि दी गई है वह वर्ष 2019-20 की बकाया राशि थी जबकि वित्तीय वर्ष 2020-21 लगभग समाप्ति की ओर है। यह जानकारी विधायक वासुदेव देवनानी द्वारा बुधवार को विधान सभा में गौशालाओं को दिये जाने वाले अनुदान को लेकर पूछे गये एक तारांकित प्रश्न के जवाब में सरकार ने दी है।
देवनानी ने राज्य सरकार पर गौशालाओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा गौशालाओं को वर्ष 2020-21 के माह अप्रेल से वर्तमान तक 11 माह की अवधि के लिए देय अनुदान की राशि में से एक रूपया भी नहीं दिया गया है। कोरोना कालखण्ड में गौशालाओं की स्थिति सरकार से मिलने वाले अनुदान के अभाव में बहुत दयनीय हो गई थी जबकि लाॅकडाउन के दौरान गौशालाओं को भामाशाहों व आमजन का सहयोग भी नहीं मिल सका।
देवनानी ने उनको प्राप्त हुए जवाब के हवाले से बताया कि वर्तमान में प्रदेश की 2018 गौशालाओं को सरकार ने अनुदान के लिए पात्र माना है। इन गौशालाओं में कुल 930746 गौवंश मौजूद है। वर्तमान में गौशालाओं के बड़े गौवंश हेतु 40 रू तथा छोटे गौवंश हेतु 20 रू. प्रतिदिन की दर से अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान राशि अधिकतम 180 दिवस के लिए दो चरणों में दिया जाता है।
देवनानी ने बताया कि वर्तमान में अजमेर जिले की 27 गौशालाओं के 10683 गौवंश को सरकार द्वारा अनुदान दिया जा रहा है। वर्ष 2020-21 के प्रथम चरण में पिछले साल की बकाया राशि के रूप में 3 करोड 5 लाख 68 हजार रू. की अनुदान राशि इन गौशालाओं को सरकार द्वारा दी गई है जबकि द्वितीय चरण के अनुदान का अभी तक कोई अता-पता नहीं है।