
अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उर्दू की तरह ही सिंधी भाषा में शिक्षा प्राप्त करने के इच्छुक प्रदेश के छात्र-छात्राओं को सुव्यवस्थित तरीके से अध्ययन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सिंधी शिक्षकों के नये पद सृजित किये जाए।
देवनानी ने मुख्यमंत्री को लिखे गये पत्र में इस बात का उल्लेख किया है कि जिस प्रकार गत दिनों विधान सभा में वित्त एवं विनियोग विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार ने प्राथमिक स्तर पर 20 छात्र-छात्रा उर्दू में शिक्षा प्राप्त करने हेतु नामांकित होने पर उस प्राथमिक विद्यालय में उर्दू अध्यापक का पद सृजित किये जाने तथा छठी व उससे उच्च कक्षाओं में 10 से अधिक विद्यार्थी होने पर उर्दू शिक्षक की पूर्ववत व्यवस्था जारी रखते हुए उर्दू शिक्षकों के पद बढ़ाने की घोषणा की है, उसी प्रकार प्रदेश में सिंधी भाषा में शिक्षा प्राप्त करने हेतु इच्छुक छात्र-छात्राओं के अध्ययन हेतु भी सिंधी शिक्षकों के पद सृजित किये जाने की आवश्यकता है।
देवनानी ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि सिंधी भाषा एक प्राचीनतम व वैज्ञानिक भाषा है जो कि संवधिान की 8वीं अनुसूची में भी शामिल है। प्रदेश के सभी जिलों में सिंधी समाज के लोग निवास करते है। अजमेर, जोधपुर, जयपुर, कोटा, अलवर, श्रीगंगानगर, बीकानेर सहित कई जिलों में बड़ी संख्या में भी सिंधी समाज के लोग रहते है। सिंधी समाज के लोग अपनी भाषा से बेहद लगाव रखते है तथा बोलचाल व व्यवहार में भी इसका पूरा उपयोग करते है। समाज की भावी पीढ़ी भी सिंधी भाषा लिखना-पढ़ना सीख सके इसके लिए विद्यालयों में सिंधी भाषा के शिक्षण की समुचित व्यवस्था कराये जाने की आवश्यकता है।