अजमेर 7 जून। देश की एकता एवं अखण्डता के लिये अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीर शिरोमणी सम्राट पृथ्वीराज चौहान की 855वीं जयन्ती को ज्येष्ठ कृष्णा द्वादशी आज घर घर सम्राट पृथ्वीराज चौहान के चित्र पर दीप प्रज्जव्लित किये गये। समारोह समिति द्वारा सात दिवसीय आयोजित किये गये जिसमें आज संगोष्ठी में मुख्य वक्ता राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य डाॅ. शिव सिंह राठौड ने कहा कि देश का निर्माण संस्कार व संस्कृति से होता है यह देखने को मिला कि सम्राट पृथ्वीराज के शासन में वह संदेश देकर मजबूती से डटे रहते थे। वर्तमान परिपेक्ष में पृथ्वीराज चौहान का बलिदान पढने और आचरण में लाना चाहिए व समय की मांग है कि युवाओं को समय गुणवता के साथ उन्नति के लिए परिवर्तन जरूरी है।
उन्होने पृथ्वीराज चौहान के जीवन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि सम्राट पृथ्वराज चौहान इतिहास की ऐसी महान विभूति हैं, जिन्होंने राष्ट्र की अखण्डता, अक्षुणता को जीवन का सर्वोपरि और परम् ध्येय बनाया तथा जीवन के अंतिम क्षण तक अपने इस ध्येय की पूर्ति में जुटे रहकर शहीद हो गए। चौहान कुलावंतस पृथ्वीराज महापराक्रमी, प्रजावत्सल, पुण्यप्रतापी, विधाओं एवं कलाओं के मर्मज्ञ, शस्त्र व शास्त्र के ज्ञाता तथा आन-बान के धनी थे। यशोमूर्ति सम्राट पृथ्वीराज अजयमेरू के शासक राजा सोमेश्वर एवं रानी कर्पूरी देवी की संतान थे। इनका मात्र ग्यारह वर्ष की अल्प आयु में राज्यााभिषेक हुआ था। उनका तत्कालीन साम्राज्य हर्षवर्द्धन के राज्य से भी बड़ा था। सम्राट पृथ्वीराज की कीर्ति दिग्दिगंत विस्तीर्ण थी। वे धनुर्विधा के विशाल अचूक तीरंदाज और शब्दभेदी बाण चलाने में पारंगत थे। राजा दशरथ के पश्चात् वे ही ऐसे राजपुरूष हुए, जिन्हें शब्दभेदी बाण में सिद्धहस्तता प्राप्त थी। संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, पैशाची, मागधी व सूरसैनी के ज्ञाता व युद्धवीर कृतीवीर, धर्मवीर क्या-क्या नहीं थे। अजयमेरू से दिल्ली तक के वृहत साम्राज्य को संचालित करने वाले सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने अपने जीवन काल में विदेशी विधर्मी आक्रामकों की हिन्दुस्तान विजय की कुटिल कामना पूरी नहीं होने दी। पृथ्वीराज एक युग के उस संकल्प के प्रतीक बने, जिसने विधर्मी आक्रामकों के स्वप्नों को चूर करने की जनभावनाओं को प्रकट किया।
पूर्व सांसद व जिनके कार्यकाल में स्मारक का निर्माण हुआ अध्यक्षता करते हुये ओंकार सिंह लखावत ने कहा कि पृथ्वीराज चौहान स्मारक का रजत जयंती वर्ष की सभी को शुभकामनायें देते हुये कहा कि सभी के सहयोग को याद किया। सम्राट पृथ्वीराज का व्यक्तित्व हमारे में जुड जाये ऐसे सफल प्रयास किये जा रहे है। चन्द्रवरदाई के बगैर पृथ्वीराज की कल्पना व्यर्थ है और स्मारक के साथ चन्द्रवरदाई नगर व खेल स्टेडियम का निर्माण करवाया गया। जयंती के कार्यक्रमों से वीरता का भाव पैदा होता है और हम सही इतिहास की दिशा में काम करें, विद्यार्थियों की ओर से शोध कार्य हो एवं विभिन्न आयामों पर कार्य हो। जिसमें भारत है, जिसमें इतिहास है भारत की जीवन पद्धति है, और चुनौती का सामना करने के लिये हमारे मार्ग पृथ्वरीराज चौहान कालजई है किसी सीमाओं मे बंधा हुआ नहीं है जहां तक हमारा विचार जाये हमारी लेखनी जाये ।
कार्यक्रम का संचालन समारोह समिति के कवंल प्रकाश किशनानी ने कहा कि सात दिवसीय आॅनलाइन कार्यक्रम आयोजित किये गये जिन महानुभावों ने इसमें भाग लिया है प्रतियोगिताओं में क्रमशः प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पर रहने वाले विजेताओं को कोरोना काल के बाद सार्वजनिक कार्यक्रम में पुरस्कृत किया जाएगा। समारोह का धन्यावाद पूर्व उप-महापौर सम्पत सांखला ने ज्ञापित किया।
प्रधानमंत्री द्वारा दिया गया संदेश
पूर्व में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी सम्बोधित करते हुये विचार प्रकट किये थे कि यह वीरो की भूमि है और आज हम पृथ्वीराज के पराक्रम को याद करते है और पृथ्वीराज चौहान का नाम लेकर हम प्रेरणा लेते हैं। हमारे रौंगटे खडे होते है वीरता का भाव पैदा होता है और हमने लेकिन हर राष्ट्र त्याग तपस्या, करूणता, सवेंदना करूणा ममता, पीढी दर पीढी प्रेरणा देता है। आज प्रेरणा लेकर आगे जाने का संकल्प किया जाए।
मुख्यमंत्री राजस्थान द्वारा दिया गया संदेश-
आज राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संदेश देते हुये कहा कि अदम्य साहस के धनी, शौर्य और वीरता के प्रतीक, महान योद्धा सम्राट पृथ्वीराज चौहान की जयंती पर नमन.. उनके पराक्रम की गाथाएं प्रेरणादायी हैं।
प्रतिवर्ष इन कार्यक्रमों में अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम अजमेर, पर्यटन विभाग, पृथ्वीराज ऐतिहासिक व सांस्कृतिक शोध केन्द्र मदस विश्वविद्यालय, अजमेर डेयरी, भारतीय इतिहास संकलन व सम्राट पृथ्वीराज चौहान समारोह समिति के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किए जाते है।
कंवल प्रकाश किशनानी
सम्राट पृथ्वीराज चौहान समारोह समिति
9829070059