
सोमवार को कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में उन्होंने कहा कि अजमेर में पेयजल संकट के लिए कांग्रेस सरकार जिम्मेदार है। अधिकारी सरकार के काबू में नहीं हैं और पूरी तरह मनमानी करते हैं। जनता और जनप्रतिनिधियों की अधिकारियों को कोई परवाह नहीं है। वर्तमान में पूरे शहर में 72 से 96 घंटे से पानी सप्लाई किया जा रहा है। पानी का प्रेशर इतना कम होता है कि लोगों को एक घंटे में एक मटका पानी भी नहीं मिल पाता है। जब पीने का पानी ही पूरा नहीं मिल पाता है, तो नहाने-धोने के लिए पानी मिलने का सवाल ही नहीं होता है। उन्होंने कहा कि फाॅयसागर रोड पर फिल्टर प्लांट के अधीन पूरे क्षेत्र, वैशाली नगर,पंचशील,हरिभाऊ उपाध्याय नगर मुख्य व विस्तार, महाराणा प्रताप नगर, प्रगति नगर, पत्रकार काॅलोनी, पसंद नगर, कीर्ति नगर, प्रेम नगर, सागर विहार काॅलोनी, श्रीराम विहार काॅलोनी, पुष्कर रोड, नागफणी सहित अनेक क्षेत्रों में लोग पानी की समस्या से काफी परेशान हैं। पानी सप्लाई का कोई समय तय नहीं है। कभी सुबह, तो कभी शाम या रात को पानी सप्लाई किया जाता है। कई बार तो सुबह की सप्लाई रात 11 बजे तक नहीं दी जाती है और लोग दिनभर इंतजार करते रहते हैं।
पुरानी पाइप लाइनें बदलें, हैंडपम्प ठीक कराएं
देवनानी ने कहा कि जिन क्षेत्रों में आबादी बढ़ने के साथ पाइप लाइनें छोटी पड़ने लगी हैं या काफी पुरानी हो गई हैं, उन्हें जल्द से जल्द बदलने का कार्य शुरू किया जाना चाहिए। कई क्षेत्रों में हैंडपम्प खराब पड़े हैं, जिन्हें ठीक कराया जाए। हैंडपम्प खराब होने के कारण नल नहीं आने की स्थिति में लोग इनसे भी पानी नहीं भर पाते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन माह में 50 से अधिक पत्र लिखने और सहायक अभियंता से लेकर अधीक्षण अभियंता व मुख्य अभियंता तक मुलाकात करने के बाद भी अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगी है। इस बारे में कलेक्टर को भी कई बार अवगत कराया जा चुका है, फिर भी स्थिति जस की तस है।
अधिकारी बातों पर भरोसा नहीं करें, फील्ड में जाकर हकीकत देखें
जब अधिकारियों ने यह कहा कि पेयजल संकट की जैसी स्थिति बताई जा रही है, वैसी नहीं है, तो इस पर देवनानी ने अधिकारियों के इस दावे को पूरी तरह झुठलाते हुए कहा कि वे सही स्थिति से वाकिफ नहीं हैं और केवल अपने मन से झूठे दावे कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह दावे करने वाले अधिकारी एक बार भी फील्ड में जाकर वस्तुस्थिति नहीं देखते हैं और निचले कर्मचारियों की बात पर विश्वास कर झूठे दावे करते हैं। उन्होंने अधिकारियों को नसीहत दी कि वे खुद मौके पर जाकर हकीकत से रूबरू हों। केवल बातें करने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि वे जनता के बीच रहते हैं और जनता की तकलीफों से अच्छी तरह वाकिफ हैं, इसलिए जनता की परेशानी को हर बैठक में उठाते हैं, जबकि अधिकारी खुद को बचाने के लिए गलतबयानी करते हैं।
आखिर इतना पैसा आता है, तो जाता कहां है
देवनानी ने कहा कि उत्तर विधानसभा क्षेत्र के अधीन ग्रामीण क्षेत्रों में तो पेयजल संकट की स्थिति और ज्यादा खराब है। उन्हें यह बात अभी तक समझ में नहीं आ रही है कि पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल में पेयजल के लिए खूब पैसा दिया गया, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भी खूब पैसा मिल रहा है और कांग्रेस सरकार भी खूब पैसा देने का दावा करती है, तो फिर इतना सारा पैसा कहां जा रहा है। यदि इतने धन का उपयोग हुआ होता, तो आज शहर में पेयजल संकट पूरी तरह खत्म हो गया होता। उन्होंने कहा कि पेयजल संकट से परेशान जनता जब जेईएन, एईएन सहित अन्य अधिकारियों को फोन करती है, तो वे फोन अटैंड नहीं करते हैं। कहीं ऐसा नहीं हो कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण जनता का आक्रोश फूट जाए। उन्होंने अधिकारी की बीसलपुर से दो पाइप लाइन से पानी आता है। एक स्टील की है, तो दूसरी आरसीसी की। चूंकि पानी के दबाव से आरसीसी की पाइप लाइन आए दिन लीकेज हो जाती है, इसलिए इसे बदल कर स्टील की पाइप लाइन डालने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। उन्होंने कलेक्टर से आग्रह किया कि वे खुद पेयजल सप्लाई व्यवस्था की माॅनिटरिंग करें, तब ही व्यवस्था में सुधार हो सकता है।