
उन्होंने कहा, हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में ही दो दशक पहले जनसंख्या नियंत्रण कानून विधानसभा में पारित कर लागू किया जा चुका है। इसी के तहत पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने वालों तथा सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने वालों के लिए दो बच्चों का प्रावधान रखा गया। इस कानून को लागू करने का असर भी हुआ है। दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, तो बेरोजगार युवा किसी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं।
पत्र में कहा गया है कि इसके बावजूद जनसंख्या पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। प्राइवेट नौकरी-धंधा करने वालों या अन्य तरीके से रोजी कमाने वालों पर यह कानून प्रभावी नहीं हो रहा है। इसके लिए सरकार को कुछ ऐसे प्रावधान करने चाहिए, जिससे अन्य लोगों पर भी यह कानून प्रभावी तरीके से लागू हो सके। पत्र में सुझाव दिया गया है कि इसके लिए लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए जन-जागरण अभियान चलाए जा सकते हैं, लोगों ’’हम दो, हमारे दो’’ की भावना के साथ परिवार सीमित रखने के लिए प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं या फिर अन्य प्रावधान लागू कर जनसंख्या नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
देवनानी ने कहा है कि किसी भी राज्य और देश का विकास तभी संभव है, जब जनसंख्या का भार नहीं बढ़े। हजारों-करोड़ों रूपए खर्च करने के बावजूद विकास कार्य बेमानी साबित हो जाते हैं। सड़कों पर यातायात का दबाव बढ़ जाता है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या में इजाफा हो जाता है। बेरोजगारों की संख्या दिनों-दिन बढ़ जाती है। बढ़ती संख्या और रोजगार की कमी से अपराधी पनपते हैं। यदि जनसंख्या नियंत्रण कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और इसमें सभी सम्प्रदायों और समुदायों को शामिल किया जाता है, तो राज्य की स्थिति में काफी सुधार हो सकता है।