अजमेर के साथ सरकार का सौतेला व्यवहार प्रदेश में: देवनानी

प्रो. वासुदेव देवनानी
जयपुर, 17 सितम्बर।
भाजपा वरिष्ठ नेता, पूर्व शिक्षा मंत्री एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने कहा कि जोधपुर में 6वाॅ विश्वविद्यालय खोल रहे हो। अजमेर ने आपकी क्या भैंस मारी है? महर्षि दयानंद विवि नाम से अजमेर में केवल एक ही विवि है और जोधपुर में एक के बाद 6-6 विवि खोले जा रहे हैं। अजमेर शिक्षा की नगरी रहा है उसमें भी अन्य विवि खोले जाने चाहिए, लेकिन सरकार तो जोधपुर पर मेहरबान है। अजमेर के साथ सौतेला व्यवहार सरकार कर रही है जिसका परिणाम उसे भुगतना होगा। यह बात देवनानी ने विधानसभा में शुक्रवार को ‘एमबीएम विश्वविद्यालय जोधपुर विधेयक 2021’ पर बोलते हुए कहा।
देवनानी ने कहा कि प्रदेश में सरकार की अनदेखी के चलते उच्च शिक्षा का बेडागर्क हो गया है। पहले से संचालित सरकारी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को संभालने में असफल राज्य सरकार जोधपुर में एक और नया एमबीएम विश्वविद्यालय खोलने के लिए आमाद है। जोधपुर में मल्टी फैकल्टी के एक के बाद एक 6 विश्वविद्यालय खोलना कही न कही उच्च शिक्षा मंत्री का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की नजर में अपने नम्बर बढाने का केवल और केवल एक मात्र प्रयास है।
देवनानी ने कहा कि प्रदेश में उच्च शिक्षा का हाल बेहाल है। विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों का पहले जैसा स्तर अब नहीं रहा है। विश्वविद्यालयों का मूल कार्य रिसर्च करना है लेकिन सुविधाओं के अभाव में यह कार्य भी ठण्डा पडा है। राज्य में 27 राजकीय विश्वविद्यालय है उसमें से 10 विवि ने 3598 रिसर्च पेपर अपलोड किए है जबकि अकेले कोलकता विश्वविद्यालय के साढे बारह हजार से ज्यादा है। देशभर के 476 विश्वविद्यालय में 3 लाख से अधिक थिसिस है जबकि राजस्थान विवि में 366 है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों के पद खाली पडे हैं। रिक्त पदों की बात करे तो राजस्थान विश्वविद्यालय में 61 में 58 पद, सुखाडिया विवि में 26 में 20, कोटा विवि में 6 में 3, बीकानेर गंगाधर विवि में 9 में से 8 एवं जेएनयू में 53 में से 45 प्रोफेसर के पद रिक्त पडे है। एसोसिएट प्रोफेसर पदों की तो हालत और भी खराब है। राजस्थान विवि में 135 में से 113, सुखाडिया विवि में 51 में से 26, जेएनयू में 119 में 93 में पद रिक्त है। प्रदेश के 27 विवि में से 21 में तो परीक्षा कंट्रोलर ही नहीं है। इस स्थिति में परीक्षा कौन कराएगा यह विचारणीय प्रश्न है। 67 राजकीय काॅलेजों में से 51 में तो प्रिंसिपल ही नहीं लगे हुए है। इन विश्विविद्यालयों में न कोई कक्षाएं लग रही है और विद्यार्थियों की पढाई हो पा रही है। यहाॅ प्रवेश लेने वाले 30 लाख विद्यार्थी अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एमबीएम काॅलेज राजस्थान का सबसे पुराना प्रतिष्ठित इंजिनियरिंग काॅलेज है। कभी समय था जब पूरे भारत में रूडकी के बाद एमबीएम काॅलेज का नाम लिया जाता था। प्रवेश के लिए बहुत मारा-मारी रहती थी। अब सरकार एमबीएम इंजिनियरिंग काॅलेज को विश्वविद्यालय बनाकर न केवल इंजिनियरिंग काॅलेज की प्रतिष्ठा को तो नुकसान पहुंचा रहे है बल्कि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय को भी आधा किया जा रहा है। अगर सरकार को करना ही था तो इंजिनियरिंग से जुडे विषय को आगे करते। सरकार ने इस इंजिनियरिंग काॅलेज में पेट्रोलियम विभाग खोलने की अनुमति दी थी और उस पेट्रोलियम विभाग को भी गंभीरता से नहीं लिया। विभाग का विभागाध्यक्ष तक नहीं है। 60 सीटे है लेकिन शैक्षणिक पद रिक्त पडे हैं। सरकार रिफायनरी के आधार पर एमबीएम काॅलेज को विश्वविद्यालय बनाने की बात कर रहे है। एक विभाग की आप व्यवस्था नहीं कर पाए, विश्वविद्यालय की कितनी व्यवस्था कर पाएंगे यह कहा नहीं जा सकता है। पिछले बजट में इस विश्वविद्यालय के लिए 20 करोड की घोषणा की जिसे 10 करोड तक ले आए। इस विश्वविद्यालय के लिए जयनारायण व्यास विवि की 107 एकड जमीन मर्ज करनी पडेगी। एमबीएम विवि के परिसर में आ रहे जयनारायण व्यास विवि के काॅमर्स सब्जेक्ट के मैनेजमेंट भवन को एमबीएम में मर्ज किया जाएगा या भवन को खाली कराया जाएगा अभी स्पष्ट नहीं है। इससे कौनसे महाविद्यालय संबद्ध किए जाएंगे यह भी साफ नहीं है। सरकार सब होचपोच में कर रही है।

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