केकड़ी 17 सितंबर (पवन राठी)जलझूलनी ग्यारस के पावन पर्व पर भगवान/ठाकुरजी की रेवाड़िया निकाली गई।प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा का आज भी निर्वहन जारी है और उसी क्रम में आज भी ठाकुरजी को बेवाण में विराजित कर रेवाड़िया निकाली जाती है गांव/शहर में भ्रमण के बाद अंत मे ठाकुर जी के बेवाण नदी/तालाब पंहुचते है वंहा ठाकुरजी को जलविहार करवाने की परंपरा है।
यही सब देखने के लिए आज मैंने केकड़ी के निकटस्थ स्थित ग्राम अजगरा का दौरा किया और जाना कि शहरों से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रो में आस्था आज भी सब पर भारी है।गांव में स्थित सभी मंदिरों से ठाकुरजी को सुसज्जित बेवाण में विराजित कर रेवाड़ी गांव भर में निकाली गई जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने दिलखोलकर शिरकत की।अंत मे सभी बेवाण तालाब पर पंहुचे जंहा ठाकुर जी को जलविहार करवा कर वापस मंदिर ले जाया गया आरती कर प्रसाद वितरित किया गया।
रेवाडियो केबेवाण उठाने वालों में गोपाल वैष्णव रवि कुमार शर्मा जुगल शर्मा बनवारी शर्मा पिंटू जांगिड़ हेमंत जैन राम लाल माली प्रमुख थे।समस्त ग्रामवासी इस अवसर पर उपस्थित थे।
पुरातन मान्यता के अनुसार छोटे बच्चो को ठाकुर जी के बेवाण के नीचे से निकाला गया इसके पीछे यह मान्यता है कि बच्चा निरोग रहता है और दीर्घायु प्राप्त करता है रावडियो के मार्ग में यह सिलसिला अनवरत जारी रहा।