अंगारों की होली –लडकिया भी नही रही पीछे–घास भेरू की सवारी-पुलिस संरक्षण में निकाली गई

केकड़ी 6 नवंबर(पवन राठी) प्राचीन काल से चली आ रही घास भेरू की सवारी अंततोगत्वा पुलिस संरक्षण में निकाली गई।
परंपरा के अनुसार घास भेरु को गोवर्धन के दिन नगर भ्रमण करवाया जाता है इसके पीछे मान्यता यह है कि इससे आपदाओं से शहर मुक्त रहता है और अमन चैन कायम रहता है।
दीवाली से पूर्व ही पर्व आयोजन समिति के तत्त्वावधान में उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देकर प्राचीन काल से चली आ रही परंपरा के निर्वहन हेतु अनुमति मांगी गई थी परंतु नही दी गई।इस अनुमति के लिए पक्ष विपक्ष और अनेक सामाजिक संगठन एक मत थे।
5 नवंबर को दोपहर में ही कुछ हुड दंगियो द्वारा घास भेरू को नियत स्थान से 100 मीटर दूर बीच बाजार ले आया गया था। इसकी सूचना सिटी थानाधिकारी को मिलने पर बड़ी संख्या में पुलिस जाप्ता तैनात किया गया।पुलिस के पंहुचने से पूर्व ही हुड दंगी भाग छुटे थे।
युवाओं ने टोलिया बनाकर अंगारों की होली खेलना प्रारम्भ कर दिया था।खतरनाक फटाखे एक टोली द्वारा दूसरी टोली की और फेके जाते रहे।अंगारों की होली शहर में जगदीशपुरा क्षेत्र से बैल पूजा के दौरान प्रारम्भ हुई जो कुछ घंटों में ही नगर के विभिन्न हिस्सों में फैल गई और देखते देखते ही सदा आबाद रहने वाले बाजार में वीरानी छा गयी।अंगारों की होली के चलते बड़ी संख्या में प्रमुख स्थानों में पुलिस तैनात की गई थी और बेरिकेटिंग्स लगाई गई थी इसके बाद भी अंगारों का यह खेल रुकने का नाम नही ले रहा था और हुडदंगियो और पुलिस के बीच चूहे बिल्ली का खेल निरंतर जारी रहा।पुलिस को देखते ही हुड़दंगी गायब हो जाते और पुलिस जवानों के इधर उधर जाते ही हुडदंगी वापस आकर खतरनाक फटाखे फेकने लग जाते।इस बार लडकिया भी इसमें पीछे नही रही–अनेक स्थानों पर लड़कियों को भी खतरनाक फटाखे फेंकते देखा गया।
घास भेरू की सवारी के संपन्न होने के बाद ही अंगारों की होली पर विराम लग पाया तब कंही जाकर पुलिस और उप खंड प्रशासन राहत की सांस ले पाया।
अंगारों की केकड़ी की यह होली पूरे राज्य में विख्यात हो चुकी है।

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