हंसते मुस्कराते जिये खुशहाल जिन्दगी part 8

dr. j k garg
कभी-कभी किसी को देखकर,उसकी असफलता पर,उसकी बात सुनकर अथवा व्यंगात्मक भाषा में हँसते हुए उनका उपहास या मजाक करना क्रूर हास्य होता है। जिससे वैर और द्वेष बढ़ने की संभावना ही बनती है।दूसरों की हँसी उड़ाना या‘उपहास’करना बहुत ही निम्न श्रेणी का निंदा हास्य है इसलिए ऐसा कभी भी नहीं करना चाहिए । द्रौपदी की दुर्योधन पर हँसी आ गयी‘ थी जो बाद में महाभारत के विनाशकारी ऐतिहासिक युद्ध का कारण बना |
होली-दीवाली पर जनता खुलकर रंग-व्यंग्य करती थी। शादी-ब्याहों में गाली-गलौज, एक-दूसरे पर फब्ती कसना नाच-गानों के माध्यम से चलता रहता था। ऐसे अनेक रस्मे जैसे कंगना खिलाना,मटके तुड़वाना डंडी खिलवाना व दूल्हे से शादी के पश्चात छंद सुनना, विवाह के समय दुल्हन की मां का दुल्हे की नाक को भींचना, दूल्हे के जूते को छिपाना आदि केवल हमारी सामाजिक परम्पराओं के निर्मल आनंद वह विशुद्ध हास्य के उदाहरण है |

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