हंसते मुस्कराते जिये खुशहाल जिन्दगी part 10

j k garg
मेरे परम मित्र श्री शरद फालुके जो बेंगलुरु निवासी हैं 2011 से बेंगलुरु में लाफ्टर क्लब का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं जिनमें सैकड़ों नर नारी युवा सीनियर सिटीजन नियमित रूप से भाग लेते हैं और स्वस्थ जीवन का आनन्द लेते हैं | पिछले दो वर्षो से कोरोनावायरस से त्रस्त डरावने वातावरण में कोरोना वायरस के विरुद्ध प्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिये हास्य योग सिखा रहे हैं जो समाज सेवा का उत्तम उदाहरण है | श्री फालुके को साधुवाद और धन्यवाद |
कोरोना के विभिन्न रूपों की महामारी से पीड़ित मानव के लिये निसंदेह मुस्कुराना और हंसते हुए जीने की कला आज के समय की जरूरत है इसीलिए हर हाल में जिंदगी का साथ निभाते चले जाओ, किंतु हर ग़म , हर फ़िक्र को , धुएँ में नही ,हँसी में उडाते जाओ। यदि सच पूछा जाए तो मुनष्य और जानवर में अंतर ही क्या है, सिवा इसके कि मुनष्य हँस सकता है परंतु जानवर हँस नहीं सकता। अर्थात ‘हँसना मानवता का गुण है और ना हँसना पशुता है।

डा.जे.के.गर्ग
पूर्व संयुक्त निदेशक कॉलेज शिक्षा , जयपुर

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