
कोरोना के विभिन्न रूपों की महामारी से पीड़ित मानव के लिये निसंदेह मुस्कुराना और हंसते हुए जीने की कला आज के समय की जरूरत है इसीलिए हर हाल में जिंदगी का साथ निभाते चले जाओ, किंतु हर ग़म , हर फ़िक्र को , धुएँ में नही ,हँसी में उडाते जाओ। यदि सच पूछा जाए तो मुनष्य और जानवर में अंतर ही क्या है, सिवा इसके कि मुनष्य हँस सकता है परंतु जानवर हँस नहीं सकता। अर्थात ‘हँसना मानवता का गुण है और ना हँसना पशुता है।
डा.जे.के.गर्ग
पूर्व संयुक्त निदेशक कॉलेज शिक्षा , जयपुर