दो-तीन माह में कार्यकाल समाप्त हो रहे कुलपतियों को नीतिगत निर्णय लेने से रोकें राज्यपालः देवनानी

-पूर्व शिक्षा मंत्री देवनानी का राज्यपाल कलराज मिश्र को पत्र।
-जरारासंवि सहित 10 विश्वद्यालयों के कुलपतियों का कार्यकाल हो रहा है दो-तीन माह में समाप्त।
-रोक के बाद भी गलियां निकालकर नीतिगत निर्णय लेने को आतूर इन विवि कुलपति।
-राज्यपाल से शिकायत, नीतिगत निर्णय लेने से रोकने की की मांग।

प्रो. वासुदेव देवनानी
अजमेर, 8 जुलाई।
भाजपा नेता, पूर्व शिक्षा मंत्री एवं अजमेर उत्तर विधायक वासुदेव देवनानी ने राज्यपाल कलराज मिश्र से जगद्गुरू रामानंदचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर सहित प्रदेश की 10 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की कार्यशैली पर शिकायत की है। देवनानी ने राज्यपाल को पत्र लिखते हुए कहा कि जरारासंवि सहित 10 विश्वविद्यालय ऐसे है जिनके कुलपतियों का कार्यकाल आगामी दो-तीन माह में समाप्त होने में है फिर भी राज्यपाल की रोक के बाद भी वे विभिन्न प्रकार की गलियां निकालकर नीतिगत निर्णय लेने के फिराक में है। देवनानी ने ऐसे कुलपतियों की नीतिगत निर्णय लेने पर तत्काल रोक लगाने की मांग राज्यपाल से की।
देवनानी ने कहा कि प्रदेश के 10 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों का कार्यकाल आगामी दो-तीन माह में समाप्त होने को है। राजभवन द्वारा 1 फरवरी 2022 व 16 जून 2022 को जारी आदेश में संबंधित कुलपतियों को अपने शेष कार्यकाल के दौरान कोई भी नीतिगत निर्णय लेने से बचने के निर्देश दिए गए, परंतु इतना होने के बाद भी संबंधित कुलपतियों द्वारा गलियां निकालकर परिषद की बैठक आयोजित कर नीतिगत निर्णय लेने के प्रयास जारी है। जगद्गुरू रामानंदचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर की ही बात करें तो 22 अगस्त 2022 को कार्यकाल समाप्त हो रहे ज.रा.रा.स.ंवि. कुलपति द्वारा 12 जुलाई 2022 को सिंडीकेट बैठक आयोजित करने का परिपत्र जारी दिया गया। सिंडीकेट बैठक के दौरान कुलपति द्वारा नीतिगत निर्णय लिये जाने की संभावना प्रबल है जो निश्चित ही कहीं न कहीं राजभवन द्वारा जारी आदेशों का सरासर उल्लंघन है। सिंडीकेट बैठक पर रोल लगाए जाने की सख्त आवश्यकता है। यही हालात अन्य विश्वविद्यालयों के भी है। देवनानी ने राज्यपाल से जगद्गुरू रामानंदचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर सहित सभी 10 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को ही अनुशासित करने हेतु औचित्यपूर्ण कार्रवाई कर अनुग्रहित करने का आग्रह किया ताकि व्यक्तिगत स्वार्थपूर्ति को समय रहते रोका जा सकें।

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