-केंद्र सरकार और जल जीवन मिशन तो मदद करना चाहता है, लेकिन प्रदेश सरकार नहीं चाहती
-राजनीति से प्रेरित होकर केंद्रीय केंद्र सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
-ईआरसीपी की तकनीकी रिपोर्ट खामियों से भरी, सरकार पहले उसे कराए दुरूस्त
-कांग्रेस के स्थानीय नेता तथ्यों का अच्छी तरह अध्ययन करने के बाद बयान दें, जनता को गुमराह नहीं करें

देवनानी ने जारी बयान में कहा कि केंद्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्रसिंह शेखावत इस प्रोजेक्ट में किसी तरह का रोड़ा नहीं अटका रहे हैं, बल्कि वे भी चाहते हैं कि जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो, लेकिन प्रदेश की कांग्रेस सरकार जरूरी शर्तों को पूरा तो करे। देवनानी ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजनीति से प्रेरित होकर शेखावत पर आए दिन बेजा आरोप लगाते हैं, जिनमें कोई दम नहीं होता है।
देवनानी ने कहा कि गहलोत केंद्र और मोदी की आड़ लेकर इस प्रोजेक्ट पर राजनीति कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट जनहित से जुड़ा है, किंतु गहलोत जनहित के विपरीत काम करते आए हैं और कर रहे हैं। यही कारण है कि इस प्रोजेक्ट पर अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट पर जो रिपोर्ट केंद्र सरकार को पेश की है, वह तकनीकी खामियों से भरी हुई है। गहलोत सरकार इन खामियों को दूर करने की बजाय केंद्र के सिर पर दोषारोपण कर खुद को बचाने का प्रयास कर रही है।
देवनानी ने जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब उसने भी राजस्थान सरकार को इसकी मंजूरी नहीं दी थी। ना ही मध्यप्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केंद्र को संतोषजनक जवाब दिया था। केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश से इस पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मांगा था, जो वह नहीं दे सका था। इस सारे मामले से राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत मुंह मोड़े हुए हैं और जनता के बीच गलतबयानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि गहलोत सरकार की इस प्रोजेक्ट को पूरा कराने में तनिक भी रूचि है, तो उसे केंद्र को तकनीकी खामियां दूर कर वास्तविकता के आधार पर रिपोर्ट भेजनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस के स्थानीय नेताओं को भी नसीहत दी है कि वे तथ्यों का अच्छी तरह अध्ययन करने के बाद बयानबाजी करें, जनता को गुमराह नहीं करें।