जयपुर। श्री दिगंबर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत परम पूज्य आचार्य गुरुवर विवेक सागर जी महाराज ने उपस्थित बंधुओं से कहां की सोलह कारण भावना आत्म शुद्धि से तीर्थंकर बनने का मार्ग प्रशस्त करने वाली होती हैं इन भावनाओं ने या इन भावनाओं के माध्यम से जगत का कल्याण किया जा सकता है जीवो के पुण्य को प्रबल करने की भावना बनाई जा सकती है जगत के जीवो को तारने वाले तीर्थंकर बनने का मार्ग भी इन भावनाओं के माध्यम से प्रशस्त होता है आज सोलह कारण भावना के अंतर्गत प्रवचन भक्ति भावना का दिवस है जिनवाणी के रूप में जो हमें प्राप्त हो रहा है वह आचार्य वह पदों के पश्चात वर्तमान में हमें मां जिनवाणी के रूप में मिल रहा है प्रवचन भक्ति का मतलब शास्त्र भक्ति है हम शास्त्र की महिमा को जानते नहीं हैं इसलिए शास्त्र भक्ति का मतलब भी नहीं जानते हम देव गुरु की पूजा तो करते हैं लेकिन शास्त्र की पूजा नहीं करते जैन दर्शन में तीन रत्न प्रमुख रूप से हैं देव शास्त्र गुरु शास्त्र में छह प्रकार की विशेषताएं होती है जो हमारे जीवन को परिवर्तित करने की क्षमता रखती हैं हमारे अहंकार को समाप्त करने की शक्ति रखती है और मां जिनवाणी कभी भी किसी का बुरा नहीं करती और ना ही बुरा करने की प्रेरणा हमें देती है मां जिनवाणी केवल और केवल प्राणी जगत के कल्याण की बात करती है जिनवाणी सदैव सकारात्मक पाप रहित घृणा रहित ज्ञान देती है जो मां जिनवाणी का निरंतर स्मरण करेगा उसके मन में कभी भी बुरे विचार आ ही नहीं सकते इसीलिए तो कहते हैं पाप से घृणा करो पापी से नही जो उत्कृष्ट है उससे भी अधिक उत्कृष्ट वही प्रवचन है प्रवचन हमारे पुण्य को बढ़ाने वाला होता है।
संगठन मंत्री हेमेंद्र सेठी ने बताया की इस अवसर पर परम पूज्य मुनि श्री 108 अर्चित सागर जी महाराज ने उपस्थित बंधुओं को मंगल आशीर्वाद देते हुए कहा की धर्म प्रत्येक प्राणी के साथ है चातुर्मास में श्रावक साधुओं की साधना में सहयोग करता है इस दौरान वह छोटे-छोटे नियमों की पालना भी करता है तो उसे सेवा भक्ति से अपने पुण्य को प्रबल कर अपने कर्मों की निर्जरा को कम करता है लेकिन हम अपनी अज्ञानता के कारण घरों में ही बैठे रहते हैं और समय का दुरुपयोग करते हैं आपके पास अपने बहू को सुधारने का स्वर्णिम अवसर है संतों का आगमन जब आप की नगरी में होता है तो आप को प्रमुखतया संतों की सेवा को ही अपना ध्येय बनाना चाहिए जिससे आपका पुण्य प्रबल होगा आपकी इच्छाएं पूर्ण होगी यही मेरा आपको मंगल आशीर्वाद
प्रचार संयोजक विनेश सोगानी ने बताया कि धर्म सभा का मंगलाचरण के माध्यम से विधिवत शुभारंभ ऐलक श्री 105 वीप्रमाण सागर जी महाराज ने किया एवं भगवान महावीर स्वामी व तपस्वी सम्राट आचार्य रत्न सुमति सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर परम पूज्य आचार्य गुरुवर विवेक सागर जी महाराज का पाद प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य श्री पदम चंद, विमल कुमार, अरुण कुमार, मीता कासलीवाल चोरू वालो को प्राप्त हुआ इस अवसर पर सभी सम्माननीय अतिथियों का तिलक एवं माल्यार्पण कर हेमेंद्र सेठी, विनेश सोगानी, बीरेश जैन टीटी, मुकेश कासलीवाल, अनील दीवान, राजेंद्र सोनी, विमल बाकलीवाल, मंजु बाकलीवाल, कृष्णा जैन ने स्वागत किया।