सारे विश्व में प्रसिद्ध है अजमेर दरगाह का उर्स,
देश और विदेशों में सबको होता जिसका हर्ष।
स्मार्ट सिटी अजमेर में लगता आलीशान मैला,
चाॅंद रात और रजब माह में आता यह हर वर्ष।।
यहां सूफ़ी सन्त की दरगाह और बनी है मजार,
दर्शन को आते यहां पर संसार के लोग हजार।
पुण्यतिथि के उपलक्ष में मनाया जाता त्योंहार,
चादर चढ़ाकर मन्नत पाता ख़्वाजा की मजार।।
छ: दिनों तक उर्स रस्मों के संग परवान चढ़ता,
सूफियाना कलामों द्वारा क़व्वालियां भी होता।
अजमेर उर्स-महोत्सव होता एकता का प्रतीक,
इसी दौर बीच शाही गुस्ल की रस्में अदा होता।।
भारत है धार्मिक और निष्पक्ष त्योहारों का देश,
पर्वो एवं उत्सवों के छिपें है खुशियों के संदेश।
उर्स हिंदू मुस्लिम एकता विश्व शांति का प्रतीक,
सभी समुदाय के लोग यहां आते नवाते शीश।।
बहुत बड़ी बड़ी तेग बनी है और जन्नत का गेट,
अनेंक धर्मो के अनुयायी आकर चढ़ाते है भेंट।
पारस्परिक भाई-चारे की ये है महत्त्वपूर्ण जीत,
मुख्य मक़बरे को कहते शाहजहां निज़ाम गेट।।
रचनाकार- सैनिक की कलम
गणपत लाल उदय, अजमेर राजस्थान
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