‘मिर्ज़ा साहिबा’ नाटक के कलाकारो ने अपने अभिनय से दर्शकों पर छोड़ी अमिट छाप

नई दिल्ली । डॉक्टर शशि सहगल रचित ‘मिर्ज़ा साहिबा’ नामक नाटक एलटीजी के ब्लैंक कैनवस, नई दिल्ली के रुबरू थिएटर द्वारा खेला गया। इस नाटक का निर्देशन रंग मंच की जानी मानी कलाकार और निर्देशक और नेशनल वुमेन एक्सलेंस अवार्ड से सम्मानित काजल सूरी ने किया ।

गुलज़ार साहब बहुत ही खूबसूरत कहते हैं ।
दर्द ही दर्द है इस इश्क़ में
इश्क़ में और कुछ नहीं होता
आदमी बावरा सा रहता है,
वसल हो तो जी कहता है
फिर बिछड़ना होगा
हिज्र हो तो जी कहता है
विसाल कब होगा
मिर्जा साहिबा की कहानी सहज सर्वस्व निस्वार्थ समर्पण ही प्रेम है । प्रेम अपने आप में इतना पावन है । इतना संपूर्ण कि उसके उसके सामने तो कलुषता का लौहखंड पिघल कर रह जाता है । सदियों से स्वार्थ का कहर और जुल्मो- सितम प्रेम से हारे है और आज भी हारेंगे । मौत भी उसे न कल मिट सकी थी न आज मिट पायेगी । प्रेम मर कर भी जीता है और दुनिया जीत कर भी हारती है ।

मोहब्बत की दुनिया में साहिबा का नाम विश्वास और धोखे के ताने बाने में उलझा सा प्रतीत हो, तब भी मिर्जा साहिबा का इश्क कहीं भी उन लोगों से कमतर नही माना जा सकता जिन से आज भी मोहब्बत का मयार कायम है ।मिर्जा और साहिबा की ये अमर प्रेम कहानी पंजाब के लोकगीतों में अक्सर सुनने को मिल जाती है। इस नाटक को देखने आये दर्शकों की तालियाँ से साफ पता चल रहा था कि दर्शक इस नाटक को कितना पसन्द कर रहे हैं। ‘मिर्जा साहिबा’ नाटक दर्शको द्वारा बहुत पसंद किया जा रहा है और सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह नाटक एयरोसिटी में हुआ । इसी का दूसरा शो दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में हुआ और तीसरा मंचन एलटीजी के ब्लैंक कैनवस में सफलता के साथ संपन्न हुआ । इस नाटक की प्रस्तुति बहुत अच्छी रही।

मिर्जा साहिबा नाटक के कलाकारों में मोहनयादव, जितेंद्र, जसकीरन चोपड़ा, रवनीतकौर, राहुल मल्होत्रा, नीरज तिवारी, दिनेश, दीपक, शिवम, प्रियंका, गीता, मनन सद, शुभम, संदीप, आकाश आदि थे । इन सबने अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया ।

error: Content is protected !!