विद्या भारती के आचार्य केवल पढ़ाते नही बल्कि बालको के जीवन को गढ़ते है–संतोषानंद

केकडी 30 अप्रेल(पवन राठी)
विद्या भारती के आचार्य विद्यालयों में मात्र शिक्षण नहीं कराते, अपितु बालकों का समग्र विकास कर जीवन को गढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि, पश्चिम की शिक्षा में बालकों के सर्वांगीण विकास की अवधारणा खंडित है। विद्या भारती भारतीय जीवन दर्शन के आधार पर बालकों के पंचकोशों के विकास के माध्यम से समग्र विकास की अवधारणा को पूर्ण करती है। उन्होंने अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष, विज्ञानमय कोष एवं आनंदमय कोष के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए आचार्यों को छात्रों के सर्वांगीण विकास के सूत्र बताए। डॉक्टर संतोषानंद विद्या भारती राजस्थान द्वारा आयोजित नवीन प्रधानाचार्य प्रशिक्षण वर्ग पटेल आदर्श विद्या निकेतन माध्यमिक विद्यालय में वैचारिक सत्र को संबोधित कर रहे थे। सत्र के प्रारंभ में वर्ग पालक अधिकारी प्रेम सिंह शेखावत ने डॉक्टर संतोषानंद राष्ट्रीय सह मंत्री विद्या भारती का परिचय एवं स्वागत किया।
वर्ग के बारे में जानकारी देते हुए वर्ग संयोजक किशन गोपाल कुमावत ने बताया, कि आने वाले दिनों में अखिल भारतीय मंत्री एवं संगठन मंत्रियों का वर्ग में मार्गदर्शन मिलने वाला है।
कार्यक्रम में समाजसेवी यशवंत बेली, श्रीमती आभा बेली एवं भंवरलाल चौहान भी उपस्थित थे।

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