कथक को बढ़ावा देना ही कला का सम्मान : नृत्यांगना दृष्टि रॉय

विविधा कला एवं सांस्कृतिक संस्था और अजमेर कथक कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बहुआयामी पुस्तिका का अतिथियों के हाथों हुआ विमोचन
प्रदेशभर में कथक नृत्य कला की बात होती है तो अजमेर में जन्मी सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना दृष्टि रॉय का नाम बरबस ही जुबान पर आ जाता है।
उनकी मां स्वर्गीय डॉ. नुपुर रॉय द्वारा संस्थापित संस्था विविधा कला एवं सांस्कृतिक संस्था के अलावा अजमेर कथक कला केंद्र के माध्यम से कथक कला गुरु एवं नृत्यांगना दृष्टि रॉय कथक नृत्य कला को अजमेर के अलावा प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में पहुंचाने का काम व भरसक प्रयास बीते ढाई दशक से निरन्तर कर रहीं हैं। संस्था के 25 वर्ष पूरे होने के सुअवसर, डॉ. नूपुर रॉय के 81 वीं जयंती और अजमेर कथक कला केंद्र के 15 वर्ष पूरे होने पर एक भव्यता लिए दिव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
महेश बालाहेङी
दौसा। भारतीय नृत्य कला में कथक बेहद लोकप्रिय विधा मानी जाती है। कला की साधना करने वाले इस विधा के महत्व को अच्छे से जानते और समझते भी हैं, मगर आमजन में कथक के बारे में जानकारी काफी कम है। इसका मुख्य कारण पाश्चात्य संस्कृति की तरफ लोगों का आकर्षण ज्यादा होना है। यही कारण है कि राजस्थान में ही जन्मी कथक सरीखे की विधा पीछे छूटती जा रही है या यूं कहो आज के आपाधापी के दौर में पिछड़ती जा रही है, लेकिन इस विकट स्थिति में भी अजमेर में जन्मी सुप्रसिद्ध कथक कलाकार नृत्यांगना दृष्टि रॉय अपनी साधना के साथ कथक की विधा को जनमानस तक पहुंचाने का काम प्रमुखता से कर रहीं हैं। उनसे पहले उनकी मां स्वर्गीय डॉ. नूपुर रॉय कथक नृत्य को बढ़ावा देने का काम कर चुकी
हैं।
विविधा कला एवं सांस्कृतिक संस्था की ढाई दशक पूर्व रखी गई थी आधारशिला :
कथक नृत्य विधा में राजस्थान में दृष्टि रॉय एक जाना पहचाना सुविख्यात नाम है।
मूलतः संभाग मुख्यालय अजमेर के शास्त्री नगर निवासी दृष्टि रॉय को कथक की सीख अपनी माता से मिली। दृष्टि रॉय की मां पेशे से शल्यक्रिया में दक्ष चिकित्सक थीं, लेकिन उनका झुकाव पूरी तरह कथक नृत्य की तरफ था। डॉ. नूपुर रॉय एक बेहतरीन उम्दा कथक नृत्यांगना थीं। उन्होंने ही आर्ट एंड कल्चरल ऑर्गेनाइजेशन संस्था की आधारशिला 25 साल पूर्व रखी थी। इस संस्था के माध्यम से भारतीय संस्कृति से जुड़ी नृत्य और गायन विधा को आगे बढ़ाया। साथ ही बहुसंख्यक लोगों को भी कला से जोड़ने का काम किया। डॉ. नूपुर रॉय के बाद उनकी पुत्री दृष्टि रॉय अपनी मां से मिली कला रूपी विरासत को अत्यंत सराहनीय प्रयासों से सहेज रहीं हैं। अपनी मां को सम्मान देते हुए उनके अधूरे रहे सपनों को पूरा करने में पूरी तरह जुटीं हुई हैं।
जब भी कहीं राजस्थान में कथक नृत्य कला की बात होती है तो दृष्टि रॉय का नाम बरबस जुबान पर आ ही जाता है। मां स्वर्गीय डॉ. नुपुर रॉय की संस्था विविधा कला एवं सांस्कृतिक संस्था के अलावा अजमेर कथक कला केंद्र या राजस्थान में कथक नृत्य कला की बात होती है तो दृष्टि रॉय का नाम जुबान पर आ जाता है। अपनी मां की संस्था के अलावा अजमेर कथक कला केंद्र के माध्यम से दृष्टि कथक नृत्य कला को लोगों तक पहुंचाने का काम बीते ढाई दशक से कर रहीं हैं। संस्था के 25 वर्ष पूरे होने और डॉ. नूपुर रॉय के 81 वीं जयंती और अजमेर कत्थक कला केंद्र के 15 वर्ष पूरे होने पर दृष्टि रॉय ने कथक नृत्य कला से जुड़े अनुभवों और कथक से जुड़े कार्यक्रमों से जुड़ी यादों को सहेजकर एक बहुआयामी पुस्तिका का विमोचन अतिथियों की उपस्थिति में किया। जयपुर रोड स्थित होटल क्रॉस लेन में विविधा कला एवं सांस्कृतिक संस्था तथा अजमेर कथक कला केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से संबद्ध अंग्रेजी पत्रकारिता भारतीय जनसंचार संस्थान जम्मू कश्मीर के एसोसिएट प्रोफेसर और कोर्स कोर्डिनेटर डॉ. दिलीप कुमार डे मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अध्यक्षता अजमेर के संभागीय आयुक्त सी. आर. मीना ने की। विशिष्ट अतिथि संपादक दीनबंधु चौधरी, पूर्व मंत्री एवं अजमेर दक्षिण से विधायक अनिता भदेल, राजस्थान की महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष लाड कुमारी जैन, आरपीएससी के पूर्व अध्यक्ष शिव सिंह राठौड़, पुष्कर चित्रकूट धाम के महंत गिरीश पाठक, आर्लेन प्रिंसिपल सोफिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल अजमेर समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने दृष्टि रॉय के प्रयासों के अलावा कठोर लग्नपूर्ण मेहनत को खूब जमकर सराहा।
विदेशों में भी है शिष्य : दृष्टि रॉय
अजमेर कत्थक कला केंद्र के माध्यम से 2 हजार से भी अधिक लोगों को कथक नृत्य सिखा चुकीं हैं। दृष्टि रॉय के अनेक शिष्य यूरोप, अमेरिका, कनाडा समेत कई देशों में हैं, जो वहां कथक नृत्य सीख रहे हैं। दृष्टि रॉय देश में कई बड़े मंचो पर कथक नृत्य का अलहदा एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर चुकीं हैं। दृष्टि रॉय का मानना है कि लम्बे वर्षों की साधना के बाद ही कोई निपुण कलाकार बन पाता है। केवल नृत्य के बारे में जानकारी रखना अच्छी बात है, मगर उसे कलाकार नहीं कहा जा सकता। मानव समाज में सही मायने में कथक कला को सम्मान देना ही कथक को बढ़ावा देना है। कंट्री विजन प्रतिनिधि से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि मेरी मां ही मेरी पहली गुरु हैं। उनके बाद दीक्षा देने वाले सम्माननीय गुरु आचार्य अनुपम रॉय हैं, जिनको संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित भी किया गया था। वर्तमान में ये दोनों ही इस दुनियां में नहीं हैं। लेकिन उनसे मिली शिक्षा और संस्कार को मैं आगे बढ़ाने का निरंतर काम और प्रयास कर रही हूं। मुझे कथक कला क्षेत्र में पद्मश्री प्राप्त कलाकारों का सानिध्य भी प्राप्त हुआ है। यह मेरा सौभाग्य है कि मैं भारतीय संगीत नाटक अकादमी के निर्णायक पैनल में भी शामिल हूं।
उन्होंने कहा कि जब तक सांस है तब तक भारतीय नृत्य कला की कथक विधा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम बिना किसी संकोच के अडिग होकर करती रहूंगी। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्जवलित कर की एवं मौजूद अतिथियों का साफा व दुपट्टे के साथ पुष्पगुच्छ भेंटकर भावभीना स्वागत व सम्मान किया।
कार्यक्रम में अजमेर कला कथा केन्द्र की सचिव योगबाला वैष्णव, उपाध्यक्ष पूजा चटर्जी, सेवानिवृत अतिरिक्त जिला कलेक्टर शहर सुरेश सिंधी, संरक्षक व वरिष्ठ पत्रकार गिरधर तेजवानी, मंच व्यवस्थापिका मुनमुन (पूजा) कुलश्रेष्ठ, टेबिल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया के पूर्व सचिव धनराज चौधरी, संस्था संरक्षक सुनिल दत्त जैन, जिला प्रेस क्लब संरक्षक व वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र जैमन, सचिव मुकेश त्रिवेदी सहित सैकड़ों गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मंच संचालन साक्षरता अधिकारी वर्तिका शर्मा ने किया।

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