◆विश्व हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य में “विश्व क्षितिज पर हिन्दी हिंदुस्तान की” विषयक ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय व्याख्यानमाला का हुआ आयोजन।
अंकित तिवारी :
मथुरा। अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य कला संस्कृति केंद्र भारत (रजि.) के तत्वावधान में विश्व हिन्दी दिवस के अवसर पर ‘विश्व क्षितिज पर हिन्दी हिंदुस्तान की’ विषयक ऑनलाइन व्याख्यानमाला का आयोजन हुआ,जिसकी अध्यक्षता साहित्यकार डॉ नटवर नागर द्वारा की गई।
वेबिनार का प्रारम्भ करते हुए अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत वरिष्ठ साहित्यकार डॉ खेमचंद यदुवंशी शास्त्री ने कहा कि विश्व पटल पर हिंदी की पहचान अब ग्लोबल भाषा के रूप में होनी चाहिए क्योंकि अब यह विश्व के 170 देशों के विद्यालयों में वैकल्पिक दूसरी भाषा के रूप में पढाई जा रही है,जो हर्ष के विषय है।भारतीय मूल व विदेशीजन दोनों ही अपने बच्चों को हिन्दी पढ़ाने में अब गर्व कर रहे हैं।” इसी क्रम में पूर्व सैन्य अधिकारी डॉ. एस. एस. अग्रवाल ने कहा- “भारत सरकार को चाहिए कि वह सरकारी कामकाज में अंग्रेजी के स्थान पर हिन्दी का प्रयोग करे तथा शिक्षा विभाग भी हिन्दी को अनिवार्य विषय के रूप में स्थापित करे जिससे भारत में भी यह जनजन की भाषा बने।” शिक्षिका ललिता यदुवंशी ने न्यायालय के कार्य में हिंदी भाषा को स्थापित किये जाने की माँग की।
भारत के साथ साथ अन्य देशों के विद्वान वक्ताओं ने भी इस वेबिनार में अपने विचार रखे जिसमें एक ओर जहां प्रो. डॉ. मोहनकांत गौतम (लायडेन विश्वविद्यालय,कनाडा) ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी के प्रचार प्रसार सम्बन्धी चल रही गतिविधियों से अवगत कराया वहीं दूसरी ओर प्रोफ़ेसर नीलू गुप्ता (कैलिफोर्निया) ने भारत और विश्व के अन्य देशों में हिंदी के वर्तमान का उल्लेख करते हुए विश्व स्तर पर इस भाषा को सर्वमान्य बनाए जाने पर बल दिया।
इसी श्रृंखला में अन्य देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए डॉ. अंजना सिंह (जर्मन),कपिल कुमार (बेल्जियम), डॉ. शिप्रा शिल्पी सक्सेना (जर्मन), प्राची चतुर्वेदी रंधावा (कनाडा), अशुतोष कुमार (लंदन), श्रध्दा मिश्रा (जर्मन),डॉ. स्नेहा ठाकुर (कनाडा), आनंद गिरी ‘मायालु’ (नेपाल), डॉ. रमा पूर्णिमा शर्मा (जापान), प. मदन लाल शर्मा (लन्दन),डॉ. नीलू गुप्ता (केलिफोर्निया), डॉ. प्रमिला भार्गव (कनाडा), डॉ. किरण लता वैद्य (ऑस्ट्रेलिया), प्रोफ़ेसर एस. पी. सिंह (बिहार), अवधेश कुमार सक्सेना ‘अवधेश’ (मध्यप्रदेश), दिनेश श्रीवास्तव (आजमगढ़), हीरा लाल पाण्डेय (नई दिल्ली), डॉ. ओमेन्द्र कुमार वर्मा (लखनऊ), प्रो. डॉ. अमलेंदु निहार (बलिया), डॉ. अष्टभुजा मिश्रा (बनारस), डॉ. मुकेश कुमार वर्मा (जयपुर),आशुकवि अनिल बोहरे (हाथरस), डॉ. सुल्तान अहमद रिज़वी (लखनऊ), डॉ. उषा यादव (आगरा) आदि ने हिन्दी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक लोकप्रिय बनाये जाने पर बल दिया।
संचालन युवा कवि जितेन्द्र विमल द्वारा किया गया तथा संस्थान की सदस्य डॉ. शैल कुमारी गौतम ने सभी के प्रति कृतज्ञता प्रकट की।