सिन्धी अकादमी द्वारा मासिक अदबी गोष्ठी आयोजित

साहित्यकारों ने विभिन्न विषयों पर रखे अपने विचार
जयपुर, 29 जून (वि.)। राजस्थान सिन्धी अकादमी द्वारा झालाना संस्थानिक क्षेत्र, जयपुर स्थित अकादमी संकुल में सोमवार, 29 जून, 2026 को मासिक अदबी गोष्ठी का आयोजन किया गया।
अकादमी सचिव डॉ.रजनीष हर्ष ने बताया कि गोष्ठी की अध्यक्षता अजमेर की साहित्यकार डॉ. परमेश्वरी पमनानी ने की तथा गोवर्धन भारतीअ जे ’शीशे जा घर’ की समालोचना की एवं गोष्ठी में प्रस्तुत रचनाओं का विवेचन किया। जयपुर की रिन्ने मिराजा ने कहानी ’’सिन्धियत, सिन्धियत ऐं सिन्धियत’’ प्रस्तुत की व रोमा चांदवानी ने स्वरचित कहानी ’’बन्धन’’ में आज के परिवेश पर आधारित लिव इन रिलेशनशिप के दुष्प्रभावों को दर्शाया। पूजा चांदवानी ने अपनी कविताएं ’’गर्मीअ जो मौसम’’, ’’राजा डाहर महान’’ तथा ’’छा चवां हाल ज़माने जो ’’ प्रस्तुत की।
अजमेर की गीता गोकलानी ने आलेख ’’मोहन कल्पना जे कहाणियुनि में विरहाङे जो दर्द’’ में बताया कि विभाजन के दर्द को सिन्धी समाज की आने वाली पीढ़ियों को भी भुगतना पड़ा है। अजमेर की ही अंजली हरवानी ने आलेख ’’निर्गुण कवि कबीर जो सिन्धी साहित ते असरू’’ को प्रभावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। नमिषा खेमनानी ने आलेख ’’सिन्धुपति राजा डाहर जे राज जूं वीरांगनाऊं’’ में सिन्धी राजघराने की महिलाओं के जौहर, वीरता, सूझबूझ और बलिदान की शौर्य गाथाओं का विस्तृत विवेचन किया। वीना प्रियदर्शना ने अपना आलेख ’’पर्यावरण जी शुद्धता लाइ कारगर उपाव’’ प्रस्तुत किया।
गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. खेमचन्द गोकलानी, डॉ. माला कैलाश, पार्वती भागवानी, माया वसन्दानी, वन्दिता आहूजा, हर्ष, लता कृपलानी, अशोक आहूजा तथा सिन्धी भाषी साहित्यकार, पत्रकार, अकादमी के पूर्व सदस्य एवं समाज के गणमान्य नागरिक आदि बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन नन्दिनी पंजवानी ने किया।
सचिव 

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