कहते हैं कि पानी का हमारे गुण व स्वभाव पर प्रभाव पडता है। तभी तो बहुगुणी व्यक्ति के बारे में कहा जाता है कि वह घाट घाट का पानी पिये हुए है। जानकार लोग कहते हैं कि किसी भी नए स्थान पर जाएं तो वहां का पानी जरूर पीया कीजिए, इससे उस इलाके का गुण हमारे में समाहित हो जाता है। इस तथ्य की रोषनी में विचार करें तो हम लंबे समय से बीसलपुर का पानी पी रहे हैं। यह भी सर्वविदित है कि अजमेर के लोग बहुत सहनषील हैं। पानी चार-पांच दिन में आए तो भी आंदोलित नहीं होते। पिछले तीन साल से एलिवेटेड रोड के निर्माण के दौरान हुई परेषानी को हमने सहनषीलता के साथ भोग लिया। जब हमने बीसलपुर का पानी पीना षुरू नहीं किया था, उससे पहले के नेताओं पर विचार कर लीजिए कि वे कितने दमदार थे। कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि यहां इलाइची बाई की गद्दी है। मेरे एक मित्र ने चर्चा के दौरान मजाक मजाक में कहा कि अजमेर के लोगों का मिजाज तभी बदलेगा, जब इनको चंबल का पानी पीने को मिलेगा। चंबल इलाके के लोगों का मिजाज किसी से छिपा नहीं है। बात भले ही मजाक में कही गई हो, मगर विचारणीय तो प्रतीत होती ही है। इसमें कितना दम है, यह तो चंबल का पानी पीने पर ही पता लगेगा। ज्ञातव्य है कि चंबल का पानी अजमेर लाने की चर्चा कई दिनों से हो रही है। भौतिक रूप से इसकी संभाव्यता पर एक रिपोर्ट भी बन चुकी है, मगर फाइलें ठंडे बस्ते में पडी हैं।