*—राजेन्द्र याग्निक —*
कचहरी रोड के नाले में एक युवक डूब के मर गया। इससे यह तो जाहिर हो गया कि नगर निगम प्रशासन नालों की सफाई पूरी क्षमता के साथ कर रहा है वरना नाले में इतनी जगह कहां मिलती की कोई उसमें डूब सकता था। कहते प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती और इस घटना ने नगर निगम की विशेषताओं को जाहिर कर दिया।जिसके लिए नगर निगम का धन्यवाद। इस घटना से यह बात भी स्पष्ट हो गई कि अखबारों में नालों की सफाई नहीं होने की जो खबरें छपती रहती हैं वह नगर निगम प्रशासन के खिलाफ भ्रामक दुष्प्रचार है और निश्चित रूप से इस भ्रामक प्रचार के पीछे किसी विदेशी शक्ति का हाथ है। क्योंकि अजमेर में विपक्षीदल के कांग्रेसी तो नगर निगम के भाजपा राज की तेल मालिश करके उसे और ताकतवर बनाने में जुटे हैं। ताकि पब्लिक से मुकाबले में नगर निगम का अंधा राज हमेशा जीतता रहे। नाले में डूबने वाला मानसिक रोगी था इसलिए किसी को कोई परवाह नहीं है लेकिन कभी वह हम और आप भी हो सकते हैं। इतिहास बनाने में अजमेर नगर निगम को पद्म श्री मिलना चाहिए।
अखबार में खबरों की परवाह नहीं, सूचना के अधिकार की परवाह नहीं, अवैध निर्माण पूरा होने के सालों बाद सीज किया जाता है और बाद में नगर निगम ही गाली निकाल कर सीलिंग खुला सकती है। अजमेर की इस सर्व शक्तिशाली नगर निगम को बारम्बार साष्टांग प्रणाम है। मेरा अनुरोध है कि नाले में युवक के डूबने से यह प्रमाणित हो गया कि नगर निगम बरसात के पूर्व वालों की सफाई करवा चुका है। शहर में अब जो नाले खुले हुए हैं उन्हें बंद कर दिया जाए अब किसी और के डूबके का इंतजार नहीं किया जाए। अजमेर नगर के निवासी चोट खाखा कर फौलाद के माफिक इतने सहनशील हो गए हैं कि बरसात के दिनों में यदि हम लोग डूब जाएंगे या और बस्तियां बाढ़ ग्रस्त हो जाएगी तो हम चूं तक नहीं करेंगे। क्योंकि हम विश्वास करेंगे इसमें भी किसी विदेशी ताकत का हाथ था। वरना हमारी नगर निगम तो अल्लाह की गाय है, हरा चारा खाने की तरफ ही पूरा ध्यान है। युवक के नाले में डूबने को नगर निगम का मैनेजमेंट सिस्टम भी कहा जा सकता है। जिसके अंतर्गत हो सकता है नगर निगम का कोई कर्मचारी रामप्रसाद घाट से किसी मानसिक रोगी को लाया और यहां नहाने के लिए उसे नाले बैठा कर चल दिया। भगवान करे यह हकीकत नहीं हो किंतु संदेह तो किया जा सकता है ताकि सिद्ध हो सके कि अखबारों में छपने वाली खबर झूठी है। अपन का तो इतना ही कहना है—–🎷🎷
*लिख लिख कर पत्थर हुए*
*चिल्ला चिल्ला कर कमजोर*
*अपन तो जम गए एसी में*
*दिन रात कर रहे हैं मौज*