स्वतंत्रता दिवस के बारे में क्या मैं बताऊंकैसे कह दूं कि, आजाद भारत में मैं रहता हूं,
स्वतंत्रता दिवस को, किस खुशी में मैं मनाऊं
देखकर देश की हालत, चिन्ता में मैं रहता हूं।
कहां खो गए वे हंसते-खेलते आपसी भाईचारे
उन खुशी के हर पल को याद मैं करता हूं,
माना बहुत विकास, तरक्की कर ली है देश ने
फिर भी मन के सारे सुकून को मैं खो चुका हूं।
जहां भी देखो वहीं खून-खराबा, लूट-खसोट
अब घर से बाहर निकलने पर भी मैं डरता हूं,
भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण की राजनीति से
महंगाई, बेरोजगारी के कारण मैं दुखी रहता हूं।
यही है आज की वास्तविक देश की सच्चाई
न चाहते हुए भी समारोह में मैं चला जाता हूं,
यह कैसा स्वतंत्रता दिवस मनाना पड़ रहा है
सच कहूं तो उदास मन से राष्ट्रध्वज फहराता हूं।
सच कहूं तो उदास मन से राष्ट्रध्वज फहराता हूं।
स्वरचित एवं मौलिक तथा अप्रकाशित रचना।
गोपाल नेवार,’गणेश’, सलुवा खड़गपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, पश्चिम बंगाल । 9832170390.