भारत अनुमानित 6.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 2030-31 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने को तैयार- एसएंडपी ग्लोबल

मुंबई, सितंबर, 2024- एसएंडपी ग्लोबल ने “इंडिया फॉरवर्डः इमर्जिंग पर्सपेक्टिव्ज” अध्ययन का पहला संस्करण आज प्रकाशित किया जिसमें भारत को एक अग्रणी वैश्विक अर्थव्यवस्था के तौर पर दिखाया गया है। इस रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि भारत अनुमानित 6.7 प्रतिशत की एक जबरदस्त वार्षिक वृद्धि दर के बल पर वित्त वर्ष 2030-31 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। यह वित्त वर्ष 2024 में 8.2 प्रतिशत की शानदार जीडीपी वृद्धि दर के आगे की स्थिति है जोकि इस सरकार के 7.3 प्रतिशत के पूर्व के अनुमान से अधिक है।
एसएंडपी ग्लोबल इंडिया लीडरशिप काउंसिल के प्रमुख और एसएंडपी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस के चीफ डेटा ऑफिसर अभिषेक तोमर ने कहा, “भारत का मध्यम अवधि का अनुमान बेहतर है और यह व्यापार, कृषि और एआई सहित विभिन्न क्षेत्रों में अवसरों से भरा है। ढांचागत क्षेत्र में सुधार किए जाने और ऊर्जा की मांग बढ़ने की संभावना है। भारत वृद्धि के लिए कमर कस चुका है और युवा एवं गतिशील कार्यबल के साथ यह वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को नया आकार देने को तैयार है।”
अर्थव्यवस्था और पूंजी बाजारः वित्त वर्ष 2024 में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ भारत सबसे तेजी से बढ़ रही बड़ी अर्थव्यवस्था है। कारोबारी लेनदेन और लॉजिस्टिक्स में सुधार, निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ाने और सरकारी पूंजी पर निर्भरता घटाने के लिए सतत सुधार महत्वपूर्ण है। मजबूत वृद्धि की संभावना और बेहतर नियमन की वजह से शेयर बाजारों के गतिशील और प्रतिस्पर्धी बने रहने की उम्मीद है। इस देश के प्रमुख उभरते बाजार सूचकांक में शामिल होने के बाद से भारतीय सरकारी बांडों में विदेशी निवेश बढ़ा है और आगे वृद्धि की संभावना है।
भूराजनीतिक रणनीति एवं व्यापारःव्यापार लाभ अधिकतम करने के लिए भारत को ढांचागत एवं भूराजनीतिक रणनीतियां विशेषकर अपने व्यापक समुद्र तट के संबंध में जरूरत बनानी चाहिए। भारत का करीब 90 प्रतिशत व्यापार समुद्र के रास्ते होता है जिससे जबरदस्त बंदरगाह ढांचा जरूरी हो जाता है जिससे बढ़ते निर्यात और थोक में कमोडिटी आयातों को संभाला जा सके।
ऊर्जा एवं कृषिःभारत बढ़ती घरेलू ऊर्जा मांग का सामना कर रही है और यह अक्षय एवं कम कार्बन उत्सर्जन सहित टिकाऊ प्रौद्योगिकियों की संभावना तलाश सकता है जिससे इसे अपनी ऊर्जा परिवर्तन योजना के साथ ऊर्जा सुरक्षा में संतुलन बनाने में मदद मिल सके। कृषि को ढांचागत सुविधाओं में सुधार और उत्पादकता के लिए उन्नत प्रौद्योगिकियों और नई नीतियों पर निर्भर रहना पड़ेगा। खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सिंचाई, भंडारण और आपूर्ति वितरण जैसे महत्वपूर्ण ढांचागत मुद्दों को हल करना आज के समय की जरूरत है।
एआई और डिजिटलीकरणः एआई का उपयोग आर्थिक वृद्धि बढ़ा सकताहै और पीपीपी के लिए अवसरों के साथ भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता दोहराई जा सकती है।
“इंडिया फॉरवर्ड” को एसएंडपी ग्लोबल और क्रिसिल की क्रॉस डिविजनल इंडिया रिसर्च चैप्टर जोकि एसएंडपी ग्लोबल इंडिया लीडरशिप काउंसिल की एक पहल है, द्वारा तैयार किया गया है। यह चैप्टर स्थानीय विशेषज्ञता, वैश्विक दृष्टिकोण और अपनी क्षमताओं से भारत पर एक अलग विचार उपलब्ध कराता है।

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