गीत

तुम आई नहीं  प्रिय कहा  रूक गई।
आस  मेरी  धरी की  धरी  रह गई।।
***
प्रेम की  बात को  मैं  छुपाऊं केसे।
मेरी  व्यथा  को   मैं  बताऊं केसे।।
रात  नींद   न   आई  तेरी  याद  में,
ये आंखें  खुली  की  खुली  रह गई
***
तेरा  रूप  सुंदर   मोहक भा  गया।
वीराने  मन   में  बसंत  छा  गया।।
मैं  पलके   बिछा   तेरी   राह  देखू,
आंख दर पे लगी  की लगी रह गई
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अंतर्मन   से   तुझको  चाहा   मेने।
अपना दिल से  मनहर माना मेने।।
लेकिन   तूने   अपना   माना  नही,
नैन  झील सुखी  की सुखी रह गई
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राह  में  चाह   के  दीपक  जलाऐ।
करू  इंतजार  मगर  तू न  आए।।
मेरे  प्यासे  नैन   में  नमी  रह  गई,
प्रीत में धुंध जमी की जमी रह गई,
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गीतकार मनोहरसिंह चौहान मधुकर
जावरा जिला रतलाम,मध्य प्रदेश
मोबाईल नंबर 09131436100
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