“जीरो कार्बन कैंपस की दिशा में अग्रसर MDSU: पृथ्वी दिवस पर कुलगुरु का हरित संकल्प”

महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा आज पृथ्वी दिवस का सार्थक एवं जागरूकतापूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल औपचारिकता तक सीमित न रहकर छात्रों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यावहारिक सोच और जिम्मेदारी विकसित करना रहा। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रतो दत्ता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए “जीरो कार्बन कैंपस” की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में पिछले आठ महीनों में पर्यावरणीय नवाचारों की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप विश्वविद्यालय राज्य का अग्रणी “नेट जीरो कार्बन कैंपस” बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने प्लास्टिक एवं फ्लेक्स के उपयोग में कमी, संसाधनों के संतुलित उपयोग तथा स्वच्छता अभियान के माध्यम से हरित परिसर निर्माण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंतर्गत छात्रों के साथ एक संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अपने संकल्प साझा किए। छात्रों ने कार्बन उत्सर्जन कम करने, प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग करने, ऊर्जा की बचत करने, तथा अधिक से अधिक पौधारोपण करने का संकल्प लिया। उन्होंने यह भी कहा कि वे दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव—जैसे बाजार में कपड़े का थैला उपयोग करना, अनावश्यक बिजली उपकरण बंद रखना, और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाना—को व्यवहार में लाएंगे।

इस अवसर पर छात्र अमृत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल से भेंट कर उन्हें प्रतीकात्मक रूप से एक पौधा भेंट किया। कुलगुरु प्रो अग्रवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे “एक पेड़ – माँ के नाम” अभियान को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में अपनाएं और ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण तथा हरित तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दें। कुलगुरु ने आगे कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का निर्वहन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर को पूर्णतः हरित, स्वच्छ एवं सतत विकास के मॉडल के रूप में स्थापित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। विश्वविद्यालय  द्वारा पृथ्वी दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों में जागरूकता, सहभागिता और जिम्मेदारी का एक सशक्त संदेश देने में सफल रहा, जिसने विश्वविद्यालय के “सतत विकास” के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ किया है।

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