पुष्कर सरोवर की दुर्दशा : स्वच्छता याचिका पर 25 अप्रैल को जज विमल कुमार व्यास की अदालत में होगी सुनवाई

​अजमेर/पुष्कर: तीर्थराज पुष्कर के पवित्र सरोवर की बदहाली, घाटों पर पसरी गंदगी और मुख्य मार्गों की सफाई व्यवस्था को लेकर प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया गया है। अधिवक्ता तेजस्विनी पाराशर एवं अंजलि मुखिया द्वारा जनहित में पेश की गई इस महत्वपूर्ण याचिका पर कल, 25 अप्रैल 2026 को सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट पुष्कर, श्री विमल कुमार व्यास की अदालत में सुनवाई होनी तय हुई है।
​न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर (अजमेर), आयुक्त नगर परिषद (पुष्कर), आयुक्त (अजमेर विकास प्राधिकरण/ADA) एवं उपखंड अधिकारी (पुष्कर) से कल जवाब तलब किया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन द्वारा पेश किए जाने वाले जवाब पर टिकी हुई हैं।
​इस महत्वपूर्ण मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से पूर्व लोक अभियोजक विवेक पाराशर एडवोकेट, रोहन पाराशर एवं जितेश धनवानी द्वारा प्रभावी पैरवी की जा रही है। याचिका में प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की उन रिपोर्टों का हवाला दिया गया है, जो धार्मिक स्थलों पर व्याप्त गंदगी और पारिस्थितिकी तंत्र को पहुँच रहे नुकसान पर गंभीर चिंता जताती हैं। याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क है कि करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र पुष्कर सरोवर और इसके घाटों को कचरे के ढेर में तब्दील कर दिया गया है, जो पर्यावरण नियमों का खुला उल्लंघन है।
​अधिवक्ता तेजस्विनी पाराशर और अंजलि मुखिया ने स्पष्ट किया है कि मुख्य मार्गों पर फैली गंदगी और ड्रेनेज की अव्यवस्था न केवल जनस्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुष्कर की छवि को भी धूमिल कर रही है। कल होने वाली इस सुनवाई में पवित्र सरोवर की स्वच्छता को लेकर न्यायालय कड़ा रुख अपना सकता है। ऐतिहासिक धरोहर और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में की गई इस कानूनी पहल ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
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