*जिला कलक्टर ने दिए आवश्यक निर्देश*
अजमेर, 9 जून। जिला कलक्टर श्री लोक बंधु की अध्यक्षता में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक का आयोजन मंगलवार को किया गया। बैठक में बाल विकास परियोजना अधिकारी श्री शैलेंद्र मथुरिया ने उपस्थित सभी अधिकारियों और सदस्यों को समेकित बाल विकास सेवाओं के अंतर्गत चलाई जा रही विभिन्न गतिविधियों, प्रगति और आगामी कार्य योजनाओं से विस्तृत रूप से अवगत कराया।
बैठक के दौरान जिला कलक्टर श्री लोक बंधु ने बच्चों और महिलाओं के कल्याण से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की। बच्चों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्हें मिलने वाला पूरक पोषाहार हर हाल में समय पर वितरित किया जाना सुनिश्चित किया जाए। जिले के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रत्येक माह की 10 तारीख तक पोषाहार अनिवार्य रूप से पहुंच जाना चाहिए। लाभार्थियों को समय पर इसका लाभ मिल सकेगा।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में भीषण गर्मी को देखते हुए सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन का समय सुबह 8 से 10 बजे तक का ही रखा जाए। इससे छोटे बच्चों को लू और तेज धूप से बचाया जा सकेगा। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि योजना के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे को नियमित रूप से दूध मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर केवल पोषण ट्रैकर ऐप का ही उपयोग किया जाए। ऑफलाइन रजिस्टर किसी भी स्थिति में उपयोग में नहीं लाए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को पोषण ट्रैकर ऐप पर पूरी गंभीरता से प्रविष्टियां (एंट्री) करने और डाटा की सही फीडिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सरकारी रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी और सटीक रहना चाहिए।
जिला कलक्टर ने निर्देश दिए कि क्षेत्र में विद्यालय जाने से वंचित रहे बच्चों की पहचान कर उनकी सूचना संग्रहित की जानी चाहिए। ऐसे सभी ड्रॉप-आउट बच्चों का नामांकन नजदीकी स्थानीय विद्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए। क्षेत्र के कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों की घर-घर जाकर या कैंपों के माध्यम से प्रभावी जांच करवाई जाए। जांच के बाद उनका उचित उपचार सुनिश्चित किया जाए। आवश्यकता होने पर उन्हें तुरंत उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया जाए। सभी कुपोषित बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य और उचित पोषण देकर सामान्य बच्चों की श्रेणी में लाना ही आंगनबाड़ी केन्द्रों का उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि सही और संतुलित पोषण देकर बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलने वाली प्री-प्राइमरी शिक्षा (पूर्व-प्राथमिक शिक्षा) भी बेहतर ढंग से दी जानी चाहिए। जिले के समस्त सरकारी विभाग आपसी समन्वय, तालमेल और टीम भावना के साथ कार्य करेंगे। इससे समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति, महिला और बच्चे तक सरकार की योजनाओं से लाभान्वित किया जा सकेगा।
इस अवसर पर अतिरिक्त जिला कलक्टर श्रीमती वन्दना खोरवाल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी श्रीमती ज्योत्स्ना रंगा तथा जिला आयोजना विभाग की संयुक्त निदेशक श्रीमती रूद्रा रेणु सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।