राजस्थान सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर रामचंद्र चौधरी का तीखा प्रहार

“अधिकारियों को खुश करने का दिखावा है ‘म्हारो खातो म्हारो बैंक’ अभियान, सहकारिता का पूरा ढांचा ही खोखला” – रामचंद्र चौधरी
अजमेर:
अजमेर डेयरी के अध्यक्ष श्री रामचंद्र चौधरी ने राजस्थान के सहकारिता विभाग की लचर कार्यप्रणाली, दिशाहीन नीतियों और जमीनी हकीकत से दूर उसकी कार्ययोजना को सीधे कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने अजमेर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक (ACCB) की दुर्दशा का उदाहरण देते हुए कहा कि सहकारिता विभाग केवल कागजी वाहवाही लूटने और उच्च अधिकारियों (बॉस) को राजी करने के लिए ‘म्हारो खातो म्हारो बैंक’ अभियान चला रहा है। जमीनी हकीकत यह है कि बुनियादी सुविधाओं से वंचित इन फर्जी खातों से आम जनता और किसानों को रत्ती भर भी फायदा नहीं होने वाला है।
श्री चौधरी ने सहकारिता विभाग के खोखले दावों की पोल खोलते हुए निम्न तीखे सवाल उठाए हैं:
अभियान के नाम पर केवल दिखावा: सहकारिता विभाग ऊपर से दबाव बनाकर ‘म्हारो खातो म्हारो बैंक’ अभियान के तहत धड़ल्ले से खाते खुलवा रहा है। जब बैंक के पास ग्राहकों को देने के लिए बुनियादी सुविधाएं ही नहीं हैं, तो ऐसे में इस अभियान का एकमात्र मकसद केवल उच्च अधिकारियों की नजरों में नंबर बढ़ाना और अपनी नाकामी पर पर्दा डालना है।
शाखाओं का सीमित और कमजोर नेटवर्क: जहां अन्य राष्ट्रीयकृत और व्यावसायिक बैंकों की जिले में 365 शाखाएं हैं और उनकी पहुंच गांव-गांव तक है, वहीं सहकारिता विभाग के अधीन ACCB की मात्र 13 शाखाएं हैं। विभाग इतने छोटे और कमजोर नेटवर्क के साथ ‘सहकारिता से समृद्धि’ का ढिंढोरा कैसे पीट सकता है?
भौगोलिक दूरी और सुरक्षा का भारी जोखिम (किसानों की जान से खिलवाड़): सहकारिता विभाग की सबसे बड़ी विफलता यह है कि दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों और गांवों से ACCB की शाखाएं लगभग 15 किलोमीटर या उससे भी अधिक दूरी पर स्थित हैं। इसके विपरीत, अन्य बैंकों की शाखाएं मात्र 4 से 5 किलोमीटर के दायरे में मौजूद हैं, जिनसे 10 से 15 गांव आसानी से जुड़े हुए हैं। इतनी दूर 15 किलोमीटर का सफर तय करके नकद पैसों का लेनदेन करना किसानों और दुग्ध उत्पादकों के लिए खतरे से खाली नहीं है। रास्ते में लूटपाट, चोरी या किसी भी अप्रिय अनहोनी का डर हमेशा बना रहता है। विभाग ग्रामीणों की सुविधा की बात करता है, लेकिन असल में उन्हें मीलों दूर धक्के खाने और अपनी गाढ़ी कमाई को जोखिम में डालने के लिए मजबूर कर रहा है।
डिजिटल युग में तकनीकी बदहाली: सहकारिता विभाग के आधुनिकीकरण के दावे पूरी तरह फेल हैं। आज के यूपीआई (UPI) और डिजिटल दौर में भी ACCB की शाखाएं इंटरनेट से पूरी तरह नहीं जुड़ पाई हैं। बिना कनेक्टिविटी के आधुनिक बैंकिंग का दावा करना जनता को सीधे-सीधे गुमराह करना है।
ग्राहकों के पैसों पर कुंडली: भुगतान व्यवस्था इतनी लचर है कि किसानों और ग्राहकों को अपने ही पैसे निकालने के लिए 3-3 दिन का लंबा इंतजार करना पड़ता है। त्वरित सेवा के नाम पर विभाग केवल कोरी बयानबाजी कर रहा है।
स्टाफ और फंड का भारी टोटा: विभाग ने अपनी शाखाओं को भगवान भरोसे छोड़ रखा है। शाखाओं में न तो काम करने और ग्राहकों की भीड़ संभालने के लिए पर्याप्त स्टाफ है और न ही लेनदेन के लिए कभी पूरा फंड (नकदी) उपलब्ध रहता है।
गबन और घोटालों का खुला अंदेशा: सहकारिता विभाग की कोई प्रभावी मॉनिटरिंग और ऑडिट व्यवस्था नहीं है, जिसके चलते ऐसी अव्यवस्थित शाखाओं में गबन और घोटालों की घटनाएं आम बात हो गई हैं। ऐसे असुरक्षित और अपारदर्शी माहौल में आम आदमी का खाता खुलवाना सीधे तौर पर जनता के पैसे को खतरे में डालना है।
अध्यक्ष श्री रामचंद्र चौधरी ने राजस्थान सरकार और सहकारिता विभाग से सख्त लहजे में मांग की है कि जब तक विभाग अपनी संस्थाओं का बुनियादी ढांचा नहीं सुधारता, इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं देता और किसानों की सुरक्षा व सुविधा सुनिश्चित नहीं करता, तब तक इस भ्रामक ‘म्हारो खातो म्हारो बैंक’ अभियान पर तुरंत रोक (Stop) लगाई जाए। जनता और किसानों का पैसा सुरक्षित रहना चाहिए, न कि विभागीय अधिकारियों के झूठे आंकड़ों की भेंट चढ़ना चाहिए।

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