जिसे कृष्ण नाम की लगन लग जाती है, उसे हर ओर श्रीकृष्ण के ही दर्शन होते हैं; संतों के आचरण से जीवन होता है पवित्र
भागवत कथा भगवान श्रीकृष्ण का साक्षात् स्वरूप, कथा श्रवण से प्राप्त होती है सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा
अजमेर। अंतर्राष्ट्रीय भागवत कथा वाचक डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज ने कहा कि जिसे श्रीकृष्ण नाम की लगन लग जाती है, उसे संसार के कण-कण में केवल श्रीकृष्ण ही दिखाई देते हैं। गोविंद के भजन से जीवन में सुख, शांति और परम आनंद की प्राप्ति होती है। श्रीमद्भागवत ब्रह्म के समान है तथा जीव को भगवान से जोड़ने वाला सर्वोच्च आध्यात्मिक सेतु है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण एवं वाचन उसी संत से कराना चाहिए, जिसने गुरु चरणों में बैठकर भागवत का विधिवत अध्ययन किया हो।
कथा प्रवक्ता उमेश गर्ग ने बताया कि ज्ञान विहार स्थित श्री कल्याण जी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस महाराज श्री ने श्रीमद्भागवत के बारहों स्कंधों को भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य विग्रह का स्वरूप बताते हुए कहा कि सम्पूर्ण भागवत श्रीकृष्ण का ही प्रत्यक्ष प्रतिरूप है। विभिन्न श्लोकों के माध्यम से उन्होंने भागवत महिमा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य अपने सभी सांसारिक चिंताओं का भार भागवत पर छोड़ दे, बदले में भागवत उसे भगवान के चिंतन का अमूल्य वरदान देती है। भागवत कथा से श्रीकृष्ण का तेज, सुख और अपार कृपा प्राप्त होती है।
उन्होंने कहा कि संतों के चरणों की रज अत्यंत दुर्लभ होती है, किंतु उससे भी श्रेष्ठ उनके आदर्श आचरण का अनुसरण करना है। श्रीमद्भागवत के दूसरे श्लोक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति भागवत कथा का अधिकारी नहीं हो सकता। जो दूसरों के दुःख में प्रसन्न होता है, वह भागवत श्रवण का अधिकारी नहीं है। जिसके हृदय में समस्त प्राणियों के कल्याण की भावना हो, वही भागवत कथा का वास्तविक अधिकारी है। अध्ययन, अध्यापन, भजन और ज्ञानार्जन में कभी संतोष नहीं करना चाहिए।
डॉ. संजय कृष्ण सलिल जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत ‘श्री’ से सम्पन्न है, क्योंकि इसे श्रीराधारानी का सान्निध्य प्राप्त है। इसी कारण अठारह पुराणों में केवल भागवत के साथ ही ‘श्रीमद्’ शब्द जुड़ा है। जब कोई भक्त गोविंद प्रेम में पूर्णतः तल्लीन हो जाता है तो स्वयं श्रीराधारानी उसे भगवान श्रीकृष्ण की कृपा का अधिकारी बना देती हैं। भागवत की रचना, लेखन, श्रवण और चरित्र चित्रण सब कुछ भगवान की ही प्रेरणा से हुआ है। इसमें भगवान के समस्त अवतारों का वर्णन है और यह संदेश मिलता है कि भगवान ही हमारे सच्चे एवं शाश्वत सहारा हैं। भगवान की दृष्टि हर क्षण प्रत्येक जीव पर रहती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से घर से बाहर निकलते समय श्रद्धापूर्वक तिलक धारण करने का आग्रह करते हुए कहा कि तिलक ठाकुरजी के चरणों का प्रतीक है तथा इसे धारण करने से सदैव मंगल और ईश्वरीय संरक्षण की भावना बनी रहती है।
गुरुवार को विदुर चरित्र, ध्रुव चरित्र और नृसिंह अवतार की कथा होगी।
कथा में सावित्री खंडेलवाल, नरेंद्र खंडेलवाल, सरोज खंडेलवाल, किशन खंडेलवाल, शकुंतला खंडेलवाल, राधेगोपाल, सुनीता जी, कमल जी, सुमन गिरधर, श्रीराम खंडेलवाल, मंजू जी, सौरभ, गौरव, स्वाति, पूनम, माधव, केशव, राधिका, मेघा, किशिका, वंशिका, वंश, राजेंद्र प्रसाद मित्तल, दिनेश खंडेलवाल सहित सैकड़ों श्रद्धालु भक्ति भाव से उपस्थित रहे।
आयोजन समिति के अध्यक्ष कालीचरण खंडेलवाल एवं पदाधिकारी अमित बड़ाया, राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, बद्री जसोरिया, श्याम सुंदर बड़ाया, सीताराम खूंटेटा तथा जुगलकिशोर बटवाड़ा ने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का आह्वान किया।
उमेश गर्ग
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