मुंबई, 18 जून, 2026- एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के ताजा विश्लेषण के मुताबिक, वैश्विक ऊर्जा बाजारों में उल्लेखनीय परिवर्तन के बीच भारत का ऊर्जा क्षेत्र मजबूत और परिस्थितियों के अनुसार ढलने की क्षमता दिखा रहा है। हालांकि, भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कमोडिटी के प्रवाह को लगातार बदल रहे हैं, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने और उभरती डिजिटल मांग पूरी करने के लिए विविध सप्लाई चेन, घरेलू ऊर्जा संसाधनों और बुनियादी ढांचे की तैयारी का सफलतापूर्वक लाभ उठा रहा है।
तेल, बिजली, डेटा सेंटरों और कोयला बाजारों में एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के विशेषज्ञों को एक बात समान दिखती है और वह है भारत भविष्य की आर्थिक वृद्धि के लिए खुद को रणनीतिक तौर पर तैयार करते हुए दीर्घकालीन ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है।
तेल बाजार में घटनाक्रमः भारत को बेहतर विकल्प की जरूरतः कच्चे तेल के विविध मार्ग, बड़े स्टोरेज/इनवेंटरी बफर और एलपीजी के आयात समेत आयात से जुड़ी निर्भरता कम करने वाले विश्वसनीय विकल्प जहां खाड़ी देशों पर संरचनात्मक निर्भरता उजागर हुई है। भारत के संकट प्रबंधन ने निकट भविष्य में काम किया है, लेकिन लंबे समय तक रुकावट रहने से निश्चिंतता की गुंजाइश कम हो जाती है, खासकर साल के आखिर तक पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के मामले में ।
डिजिटल क्रांति को ताकतः तत्काल ईंधन सुरक्षा से परे जाकर भारत वैश्विक डेटा सेंटर क्षेत्र की विस्फोटक वृद्धि का फायदा उठाने की अनूठी स्थिति में है। भारत में डेटा सेंटर पावर की मांग सालाना 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर से बढ़ने के अनुमान के साथ यह देश एआई वर्कलोड और सीमा पार क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक रणनीतिक केंद्र के तौर पर उभर रहा है। इसके अलावा, भारत का पावर ग्रिड अपने पड़ोसी देशों की तुलना में काफी हद तक स्थिर रहा है क्योंकि एलएनजी आयात पर निर्भरता कम है और घरेलू कोयला उत्पादन को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है।
रणनीतिक स्थिरता लाने वाले कारक के तौर पर कोयलाः ग्रिड की स्थिरता को बनाए रखने में कोयले ने एक महत्वपूर्ण बैलेंसिंग ईंधन का काम किया है जिससे इस पर निरंतर निर्भरता बनी हुई है। वैश्विक स्तर पर गैस की कीमतों में उतार चढ़ाव रहने से कोयले की मांग बहुत मजबूत बनी हुई है जिससे भारत की ऊर्जा प्रणाली के लिए इसने एक किफायती और मजबूत आधार सुनिश्चित किया है।