शाहपुरा में पेनोरमा निर्माण में सुस्ती भारी, धरोहर अध्यक्ष हुए नाराज

कहा, मानकों पर नहीं होगा समझौता-अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश
शाहपुरा। मूलचन्द पेसवानी 
राजस्थान की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहरों को नई पहचान देने की दिशा में राज्य सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है, लेकिन शाहपुरा में निर्माणाधीन पेनोरमा परियोजनाओं की धीमी रफ्तार ने अब चिंता बढ़ा दी है।
बुधवार रात्रि शाहपुरा पहुंचे राजस्थान सरकार धरोहर प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने निर्माणाधीन केसरी सिंह बारहठ पेनोरमा और रामस्नेही पेनोरमा का मौके पर पहुंचकर गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान निर्माण कार्य में सुस्ती और गुणवत्ता को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए लखावत ने इंजीनियरों और ठेकेदारों को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अब किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान लखावत का रुख बेहद सख्त नजर आया। विशेष रूप से केसरी सिंह बारहठ पेनोरमा के कार्य की धीमी गति पर उन्होंने असंतोष जताया और ठेकेदार को फटकार लगाते हुए कहा कि “काम में तेजी लाओ, यह केवल निर्माण परियोजना नहीं बल्कि राष्ट्रभक्ति और बलिदान की स्मृति का केंद्र है।” उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
लखावत ने भवन निर्माण में सूरसागर, जोधपुर के उच्च गुणवत्ता वाले पत्थर के उपयोग का निर्देश देते हुए कहा कि बाहरी सौंदर्य के साथ-साथ संरचना की मजबूती भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने फ्लोरिंग और सीलिंग कार्य को भी मानकों के अनुरूप पूर्ण गुणवत्ता के साथ करवाने पर जोर दिया। साथ ही अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्धारित तकनीकी मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पेनोरमा केवल एक इमारत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास का जीवंत दस्तावेज होता है। ऐसे में निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता दोनों अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से कार्य की नियमित मॉनिटरिंग करने और प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
इसके बाद लखावत ने रामस्नेही पेनोरमा का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने विशेष रूप से मुख्य भवन की स्थिति का अवलोकन किया और बारिश के मौसम को देखते हुए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले मुख्य भवन को सुरक्षित स्तर तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि वर्षा के कारण निर्माण कार्य प्रभावित न हो। उन्होंने इंजीनियरों से कार्य की गति बढ़ाने और समयसीमा में परियोजना पूर्ण करने का निर्देश दिया।
निरीक्षण के दौरान पूर्व पालिका अध्यक्ष रघुनंदन सोनी एवं कैलाश सिंह जाड़ावत ने पेनोरमा परिसर में बेहतर गुणवत्ता वाले पौधारोपण की मांग रखी। उन्होंने कहा कि पेनोरमा परिसर केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे हरियाली और सौंदर्य से युक्त सांस्कृतिक परिसर के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इस सुझाव पर लखावत ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए गुणवत्तापूर्ण पौधारोपण पर विचार करने का आश्वासन दिया।
निरीक्षण के बाद लखावत ने महाराणा प्रताप स्मारक पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित की और महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप केवल मेवाड़ ही नहीं, पूरे राष्ट्र के स्वाभिमान, शौर्य और अदम्य साहस के प्रतीक हैं। उनके आदर्श आज भी देश को प्रेरणा देते हैं।
लखावत ने बताया कि राज्य सरकार महाराणा प्रताप के शौर्य और गौरव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए विशेष सर्किट विकास योजना पर कार्य कर रही है, जिसके माध्यम से ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को नई मजबूती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इतिहास को सहेजना केवल सरकार का कार्य नहीं बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी भी है।
इस अवसर पर पूर्व चेयरमैन रघुनंदन सोनी, कैलाश सिंह जाड़ावत, राजू सोलंकी, युवराज, पवन कुमार शर्मा, शहीद प्रताप सिंह बारहठ सेवा संस्थान के सदस्य रामप्रसाद सेन, ओम लुहार, कैलाश मेहडू, रघुवीर सिंह, जगदीश प्रसाद पारीक, ठेकेदार, श्रमिक एवं इंजीनियर राजावत सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
शाहपुरा में पेनोरमा निर्माण कार्य को लेकर लखावत की सख्ती ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि धरोहर परियोजनाओं में अब ढिलाई और लापरवाही नहीं चलेगी। प्रशासनिक सख्ती के बीच अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि चेतावनी के बाद निर्माण कार्य कितनी तेजी पकड़ता है। फिलहाल इतना तय है कि शाहपुरा की ऐतिहासिक पहचान को नया आयाम देने वाली ये परियोजनाएं अब प्रशासन की विशेष निगरानी में हैं।

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