डीटीयू और एसरी इंडिया ने जियोएआई शिक्षा एवं अनुसंधान को गति देने के लिए हाथ मिलाया

नई दिल्ली, जून, 2026- भारत में भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) सॉफ्टवेयर, लोकेशन इंटेलिजेंस और मैपिंग सॉल्यूशंस में बाजार की अग्रणी कंपनी एसरी इंडिया ने जियोएआई पर खास जोर के साथ जियोस्पैटियल टेक्नोलॉजीज़ में एक उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए दिल्ली टेक्नोलॉजी युनिवर्सिटी (डीटीयू) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की आज घोषणा की। यह साझीदारी जियोस्पैटियल कौशल और अकादमिक कार्यक्रमों के लिए उद्योग की अपेक्षाओं को पूरा करने में एक महत्वपूर्ण कदम है जिसके तहत अगली पीढ़ी के इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और डेटा वैज्ञानिकों को विश्व की अग्रणी एसरी टेक्नोलॉजी के जरिए अत्याधुनिक जीआईएस एवं जियोएआई क्षमताओं से युक्त किया जाएगा।

इस एमओयू के तहत एसरी इंडिया वैश्विक स्तर पर प्रख्यात आर्कजीआईएस सॉफ्टवेयर के साथ इस उत्कृष्टता केंद्र को स्थापित करने में डीटीयू के जियोस्पैटियल साइंस एवं टेक्नोलॉजी विभाग को सहयोग करेगी। इस केंद्र के पास आर्कजीआईएस लिविंग एटलस के जरिए सीखने के संसाधनों और जियोस्पैटियल कंटेंट तक पहुंच होगी। इस कंपनी का लक्ष्य व्यवहारिक जियोएआई सॉल्यूशंस को समर्थ बनाना, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम कराना और विद्यार्थियों के लिए मेरिट आधारित इंटर्नशिप की सुविधा देना है।

भारत के प्रमुख प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालयों में से एक डीटीयू का जियोस्पैटियल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकियों, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग और स्पेस एप्लीकेशंस आदि में मजबूत आधार है। एसरी इंडिया के साथ गठबंधन कर डीटीयू का लक्ष्य नए पाठ्यक्रम विशेषकर अपने आगामी स्नातक, स्नातकोत्तर और एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम्स के लिए पाठ्यक्रम विकसित करना और इंडो आर्कजीआईएस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर मौजूदा पाठ्यक्रमों को सुदृढ़ करना है।

एसरी इंडिया के प्रबंध निदेशक अगेन्द्र कुमार ने कहा, जियोस्पैटियल इंटेलिजेंस और एआई तेजी से एक दूसरे से जुड़ रहे हैं और भारत को ऐसे कुशल कार्यबल की जरूरत है जो वास्तविक दुनिया पर प्रभाव के लिए इस ताकत का दोहन कर सके। इस उत्कृष्टता केंद्र के जरिए डीटीयू के साथ हमारी साझीदारी, मुख्य धारा की शिक्षा व्यवस्था में जियोएआई की सोच को शामिल करने के प्रति एसरी इंडिया की प्रतिबद्धता दर्शाती है। हम डीटीयू के शिक्षकों और छात्रों के साथ मिलकर ऐसी क्षमताएं विकसित करने के उत्सुक हैं जो भारत के शहरों के नियोजन, संसाधनों के प्रबंधन और भविष्य की तैयारियों के तरीके को आकार देंगी।

डीटीयू के कुलपति प्रोफेसर प्रतीक शर्मा ने डीटीयू और एसरी इंडिया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता उद्योग और अकादमिक क्षेत्र बीच सहयोग की गाथा में एक मील का पत्थर साबित होगा और आने वाले वर्षों में कई अन्य संस्थान इसका अनुकरण करेंगे। उन्होंने डीटीयू में जियोस्पैटियल साइंस एवं टेक्नोलॉजी विभाग (डीजीएसटी) के लिए विजन रखा। उन्होंने कहा कि डीटीयू का डीजीएसटी जियोस्पैटियल शिक्षा, अनुसंधान और परामर्श के मामले में विश्व का अग्रणी बनने की आकांक्षा रखता है। डीजीएसटी का इरादा ना केवल जियोइन्फॉर्मेटिक्स में एग्जिक्यूटिव मास्टर प्रोग्राम शुरू करने, बल्कि जियोस्पैटियल साइंस व जियोइन्फॉर्मेटिक्स में स्नातक प्रोग्राम शुरू करने का भी है। डीटीयू का मानना है कि जियोस्पैटियल सेगमेंट को ना केवल एक टेक्नोलॉजी वर्टिकल विकसित करने, बल्कि जियोस्पैटियल एवं स्पेस साइंस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। डीटीयू का लक्ष्य जियोस्पैटियल साइंस एवं टेक्नोलॉजी को एक स्वतंत्र विषय के तौर पर स्थापित करने में देश में अग्रणी बनना है।

एसरी का आर्कजीआईएस इस सेंटर ऑफ एक्सिलेंस के केंद्र में होने से डीटीयू के छात्रों और शोधकर्ताओं को ना केवल नई एवं उभरती हुई प्रौद्योगिकियों का व्यवहारिक अनुभव मिलेगा, बल्कि उन तकनीकियों का भी अनुभव मिलेगा जिनका देशभर में सरकारी एजेंसियों, शहरी नियोजनकर्ताओं, रक्षा प्रतिष्ठानों और पर्यावरण संगठनों द्वारा उपयोग किया जा रहा है।

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