एमडीएस विश्वविद्यालय में परिसर विकास एवं सांस्कृतिक संरक्षण की नई पहल

परिसर विकास प्रकोष्ठ (PCD Cell) का गठन, प्रतिमाओं के संरक्षण का दायित्व विभागों एवं प्रशासनिक शाखाओं को सौंपा जाएगा

संपूर्ण विश्वविद्यालय परिवार परिसर विकास, स्वच्छता और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में निभाएगा सक्रिय भूमिका

अजमेर। महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर ने विश्वविद्यालय परिसर के समग्र विकास, सुव्यवस्थित रखरखाव तथा सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में दो महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिए हैं। कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल के मार्गदर्शन एवं अनुमोदन के उपरांत विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा परिसर विकास एवं नियोजन प्रकोष्ठ (Planning & Campus Development Cell – PCD Cell) का गठन किया गया है। साथ ही विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित महापुरुषों एवं देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के नियमित रखरखाव, स्वच्छता, माल्यार्पण एवं गरिमापूर्ण संरक्षण हेतु विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों एवं प्रशासनिक अनुभागों को वार्षिक दायित्व सौंपने का निर्णय लिया गया है।

कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मूल्यों और उत्तरदायित्वबोध का भी जीवंत परिसर होता है। परिसर का प्रत्येक भवन, प्रत्येक प्रतिमा और प्रत्येक सार्वजनिक स्थल विश्वविद्यालय की पहचान का अभिन्न अंग है। इनकी गरिमा बनाए रखना सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार का सामूहिक दायित्व है।

उन्होंने कहा कि परिसर का विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ, सुव्यवस्थित, पर्यावरण-अनुकूल एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध वातावरण का निर्माण भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय में एक समर्पित Planning & Campus Development Cell गठित किया गया है, जो परिसर के विकास, आधारभूत संरचना के उन्नयन, रखरखाव, समन्वय तथा समय-समय पर विश्वविद्यालय द्वारा सौंपे जाने वाले अन्य विकासात्मक कार्यों का मार्गदर्शन एवं अनुश्रवण करेगा।

नवगठित Planning & Campus Development Cell में पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. सुब्रत दत्ता को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त प्रो. सुभाष चन्द्र, श्री राजेन्द्र तिवारी तथा श्री सीताराम जोशी को सदस्य बनाया गया है। यह प्रकोष्ठ विश्वविद्यालय परिसर के विकास एवं नियोजन से संबंधित विषयों पर आवश्यक सुझाव देगा तथा विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं निगरानी का दायित्व निभाएगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी दूसरे कार्यालय आदेश के अनुसार परिसर में स्थापित भगवान गणेश, माँ सरस्वती, महर्षि दयानन्द सरस्वती सहित विभिन्न महापुरुषों एवं प्रेरणास्रोतों की प्रतिमाओं के नियमित संरक्षण हेतु प्रत्येक शिक्षण विभाग एवं प्रशासनिक अनुभाग को वर्ष में कम से कम एक दिवस का उत्तरदायित्व प्रदान किया जाएगा। संबंधित विभाग अपने निर्धारित दिवस पर प्रतिमा की स्वच्छता, माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन तथा गरिमापूर्ण रखरखाव की व्यवस्था अपने उपलब्ध संसाधनों से सुनिश्चित करेगा। इसके लिए विस्तृत वार्षिक रोस्टर Planning & Campus Development Cell द्वारा पृथक से जारी किया जाएगा।

इस व्यवस्था में विश्वविद्यालय के शिक्षण विभागों के साथ-साथ परीक्षा शाखा, वित्त एवं लेखा, शोध निदेशालय, सामान्य प्रशासन, रजिस्ट्रार कार्यालय, कुलगुरु सचिवालय, राष्ट्रीय सेवा योजना, उद्यान शाखा, स्वच्छता अनुभाग, स्वदेशी कंसोर्टियम सहित परिसर में कार्यरत सभी प्रशासनिक इकाइयों को सम्मिलित किया जाएगा, ताकि सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार इस सांस्कृतिक उत्तरदायित्व में सहभागी बन सके।

कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय में “मेरा विश्वविद्यालय – मेरी  जिम्मेदारी” की भावना को सुदृढ़ करेगी तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों में परिसर के प्रति आत्मीयता, अनुशासन, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन निर्णयों से विश्वविद्यालय का परिसर न केवल अधिक सुव्यवस्थित एवं आकर्षक बनेगा, बल्कि यह उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में भी स्थापित होगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि इस सम्बन्ध में आदेश जारी कर दिए गये हैं और आगामी  20 जुलाई से इनके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आवश्यक कार्यवाही प्रारम्भ कर दी गई है।

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