आजादी के बाद पहली बार, अब झील में नहीं गिरेगा नालों का पानी

विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने रखी नींव

22.60 करोड़ की लागत से होगा नालों को जोड़ने का काम

झील के चारों तरफ 14 बड़े नालों का पानी जाएगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट

झील का पानी होगा साफ, बढ़ेगी सुन्दरता एवं जलीय जलीय जीवों को मिलेगा जीवनदान

प्राकृतिक बहाव और पम्पिंग के जरिए एसटीपी तक जाएगा पानी

     अजमेर, 27 जुलाई। आजादी के बाद अजमेर की शान आनासागर झील आखिरकार नालों के गन्दे पानी से मुक्त होने वाली है। विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने सोमवार को शहर को यह सौगात दी। उन्होंने अमृत 2 योजना के तहत झील में गिरने वाले नालों को आपस में जोड़कर प्राकृतिक ढाल व पम्पिंग के जरिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाने वाली महत्वपूर्ण योजना की नींव रखी। इस योजना पर 22.60 करोड़ रूपए की लागत आएगी। योजना जल्द पूरी होगी और एसटीपी से प्रतिदिन 20 एमएलडी स्वच्छ पानी झील में छोड़ा जाएगा।

     इस इवसर पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि आनासागर झील अजमेर की शान है। शहर के प्रत्येक व्यक्ति को इस पर गर्व है। हम झील की प्राकृतिक सुंदरता और इसे शहर के जनजीवन में जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। अमृत योजना के तहत नालों को जोड़ने की यह महत्वपूर्ण योजना जल्द पूरी होगी। झील में निरंतर साफा पानी जाएगा। इससे पानी की गुणवत्ता और स्वच्छता में निरंतर सुधार आएगा। अजमेर में आनासागर के साथ ही वरूण सागर और चौरसियावास तालाबों को भी स्वच्छ और सुन्दर बनाने का काम किया जा रहा है। उदयपुर की तरह हमारा अजमेर भी झीलों की नगरी कहलाएगा।

     उन्होंने कहा कि हम अजमेर को उन्नत, विकसित, पर्यटन और रोजगार की दृष्टि से आगे बढ़ाने के लिए निरंतर काम कर रहे है। पिछले ढाई साल में सैकड़ों करोड़ की योजनाएं लागू की गई हैं। शिक्षा, पर्यटन, आईटी रोजगार व अन्य क्षेत्रों में हम तेजी से आगे बढ़ रहे है।

     उन्होंने कहा कि आनासागर झील के संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण एवं जल गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा झील में गिरने वाले 14 प्रमुख नालों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने की कार्यवाही प्रारंभ की गई है। इस संबंध में परामर्शदाता द्वारा 16 जुलाई से विस्तृत सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ कर दिया। वर्तमान में झील के चारों ओर स्थित प्रमुख 14 नालों में से कुछ नालों में वर्षा जल के साथ-साथ घरेलू सीवरेज आंशिक रूप से प्रवाह हो रहा है, जिससे झील की जल गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत लगभग 22.60 करोड़ की लागत से परियोजना स्वीकृत की गई है। इसका कार्यादेश जारी कर दिया गया है।

     उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत नालों की ट्रैपिंग, पम्पिंग स्टेशन, मैकेनिकल एवं मैनुअल स्क्रीन तथा लगभग 10.68 किमी सीवर लाइन का निर्माण किया जाएगा। इससे नालों का सीवरेज सीधे 13 एमएलडी एसटीपी तक पहुंचाकर उपचारित किया जा सकेगा तथा अनुपचारित सीवरेज का झील में प्रवाह पूर्णतः रोका जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, 13 एमएलडी एसटीपी परिसर में 7 एमएलडी क्षमता के नवीन एसटीपी का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। साथ ही भविष्य में किसी तकनीकी कारण से 13 एमएलडी एसटीपी बंद होने की स्थिति में सीवरेज को 60 एमएलडी खानपुरा एसटीपी तक डायवर्ट करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। इससे किसी भी परिस्थिति में अनुपचारित सीवरेज आनासागर झील में प्रवेश न करे। परियोजना पूर्ण होने पर आनासागर झील में प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी तथा झील के दीर्घकालीन संरक्षण एवं पर्यावरणीय सुधार में महत्वपूर्ण योगदान प्राप्त होगा।

इन नालों को जोड़ा जाएगा एसटीपी से

     काज़ी का नाला, क्रिशनगंज का नाला, शांतिपुरा का नाला, आतेड़ का नाला, चौरसियावास का नाला, रातीडांग का नाला (माहेश्वरी पब्लिक स्कूल के सामने), गणपति रीजनल कॉलेज का नाला, नौसर घाटी का नाला, मित्तल अस्पताल का नाला, बांडी का नाला, रामनगर का नाला, महावीर कॉलोनी का नाला, नागफणी का नाला, रामप्रसाद घाट का नाला

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