सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री महोदय /
शासन सचिव / प्रमुख शासन सचिव,
सहकारिता विभाग, राजस्थान सरकार,
जयपुर (राजस्थान)
दिनांक: 30 सितम्बर, 2026
विषय: सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्रीमती श्रुति भारद्वाज की RCDF के प्रबंध निदेशक (MD) पद पर पुनर्नियुक्ति/सेवा विस्तार, उनके कार्यकाल की घोर प्रशासनिक, वित्तीय अनियमितताओं, तानाशाही रवैये, मेरे द्वारा उठाए गए गंभीर आरोपों और भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच करवाने तथा ‘सरस’ ब्रांड को बचाने बाबत।
महोदय,
उपरोक्त विषय और प्रासंगिक संदर्भ में सविनय निवेदन है कि दिनांक 31.08.2026 को आईएएस श्रीमती श्रुति भारद्वाज के प्रबंध निदेशक (MD), RCDF के पद से सेवानिवृत्त होने के ठीक 30 दिन पश्चात, आज दिनांक 30.09.2026 को उन्हें पुनः इसी पद पर नियुक्त कर दिया गया है। यह अत्यंत आश्चर्यजनक है कि इस पुनर्नियुक्ति के आदेश प्रातः 09:40 बजे जारी हुए, जबकि कुछ चुनिंदा मीडिया संस्थानों द्वारा भोर होते ही इस पुनर्नियुक्ति की घोषणा कर दी गई थी और श्रीमती भारद्वाज द्वारा पूर्वाह्न 10:30 बजे ही कार्यभार भी ग्रहण कर लिया गया।
चर्चा है कि श्रीमती भारद्वाज और आरसीडीएफ में उनके कुछ चहेतों ने पिछले एक महीने में एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा था, और कुछ मीडिया संस्थानों को भी अपने पक्ष में मैनेज किया गया था। इस अभूतपूर्व और संदिग्ध पुनर्नियुक्ति तथा मेरे (अजमेर डेयरी अध्यक्ष) द्वारा मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और वित्त सचिव को लिखे गए सख्त पत्रों में उठाए गए मुद्दों ने राज्य के पशुपालकों, किसानों, डेयरी कर्मचारियों और सहकारिता जगत में भारी भूचाल ला दिया है।
मेरे द्वारा उठाए गए सभी गंभीर आरोपों, बिंदुओं और विवरणों को समाहित करते हुए संपूर्ण शिकायती विवरण बिंदुवार आपके अवलोकनार्थ प्रस्तुत है:
1. सेवारत अधिकारियों की पूर्ण अनदेखी और सेवानिवृत्त मुखिया पर अति-विश्वास: क्या किसानों की 10,000 करोड़ रुपए की इस विशाल संस्था के संचालन के लिए सरकार के पास कोई भी सेवारत आईएएस अधिकारी उपलब्ध नहीं है? इतनी बड़ी संस्था के सेवानिवृत्त मुखिया पर ही क्यों बार-बार इतना भरोसा किया जा रहा है, जबकि जिला दुग्ध संघों के प्रशासकों ने इनके पिछले कार्यकाल पर गंभीर प्रशासनिक व वित्तीय आरोप लगाए हैं?
2. कर्मचारी संघ की मांग की अवहेलना और भूमि विवाद: ‘डेयरी अधिकारी कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन’ भी सरकार से सेवारत वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की MD के पद पर नियुक्ति की मांग कर चुका है, फिर भी उसी सेवानिवृत्त अधिकारी को क्यों पुनः मुखिया बनाया गया, जिन पर मनोहरपुरी के किसानों द्वारा किसानों की जमीन हड़पने के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं?
3. जांच प्रभावित होने की आशंका और जबरन पुनर्नियुक्ति: क्या अब श्रीमती भारद्वाज, फेडरेशन की MD रहते हुए उनके विरुद्ध जिला दुग्ध संघों के प्रशासकों द्वारा लगाए गए गंभीर एवं संगीन आरोपों की जांच को प्रभावित नहीं करेंगी? क्या यह सेवानिवृत्ति पश्चात पुनर्नियुक्ति, श्रीमती भारद्वाज द्वारा सरकार से राजनीतिक व प्रशासनिक दबाव बनाकर छीनकर नहीं ली गई है?
4. बजट के दुरुपयोग की आशंका और ईआरपी (ERP) घोटाला: अगर पुनर्नियुक्ति छीनकर ली गई है, तो कहीं इस शक्ति प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2025-26 के बजट में घोषित 2,000 करोड़ रुपए के कोऑपरेटिव डेयरी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (CDIDF) का मनमुताबिक मैनेजमेंट करना और पशुपालकों के हिस्से का पैसा अपने चहेतों में बांटना तो नहीं है? इसके अलावा, जब ईआरपी (ERP) के लिए वर्ष 2022-23 के दौरान ही लगभग 25 करोड़ रुपए खर्च करके काम सफलतापर्वक पूरा हो चुका था, तो फिर से ईआरपी के नाम पर वापस 20 करोड़ रुपए बिना किसी वास्तविक काम के कहाँ और क्यों खर्च कर दिए गए? इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
5. शक्तियों का दुरुपयोग और पशु आहार टेंडर घोटाला: जब इनकी मूल सेवा के दौरान शक्तियों के दुरुपयोग की चर्चाएं आम थीं, तो सरकार द्वारा सेवानिवृत्त होने के बाद भी इन्हें इतनी असीमित प्रशासनिक एवं वित्तीय शक्तियां क्यों नवाजी गईं? सरस द्वारा विक्रय किए जाने वाले पशु आहार की दरों में इनके कार्यकाल में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। भारत सरकार द्वारा कच्चे माल व जीएसटी दरों में कटौती के बावजूद राजस्थान में पशु आहार के भाव ऐतिहासिक रूप से सर्वोच्च स्तर पर हैं, जो सीधे तौर पर गरीब पशुपालकों का खुला आर्थिक शोषण है। टेंडर प्रक्रिया को हेड ऑफिस से हटाकर पशु आहार संयंत्रों को दे दिया गया और इसे अवैध वसूली का जरिया बना लिया गया। कच्चा माल सप्लाई करने वाले ठेकेदारों के साथ मिलकर की गई खरीद प्रक्रिया में घोर अपारदर्शिता और गहरी सांठगांठ है।
6. कृत्रिम लाभ, पीआर विभाग का दुरुपयोग और चुनावी हस्तक्षेप: पशुपालकों का खून-पसीना निचोड़कर और उनका शोषण करके पशु आहार के उत्पादन से प्राप्त अनुचित लाभ को RCDF के खाते में फिक्स डिपॉजिट (FD) के रूप में जमा कर एमडी द्वारा अपनी झूठी वाहवाही लूटी जा रही है। RCDF में पीआर (PR) विभाग के माध्यम से खुद की झूठी साख चमकाने के लिए कुछ विशेष न्यूज एजेंसियों पर बेहिसाब पैसा पानी की तरह बहाया गया। ‘सरस सखी योजना’ के माध्यम से नगरीय निकाय के चुनावों को प्रभावित करने का घृणित प्रयास किया गया। एक वर्ष के कार्यकाल के दौरान हर फाइल को डिस्कशन के नाम पर जानबूझकर लंबित रखा गया और केवल ‘सेटलमेंट’ होने पर ही फाइलों को आगे निकाला गया।
7. प्रतिस्पर्धी संस्थाओं को लाभ और दिल्ली विपणन व्यवस्था की विफलता: एमडी के कार्यकाल में अमूल एवं मदर डेयरी का राजस्थान व अन्य क्षेत्रों में जबरदस्त विस्तार हुआ है, जबकि ‘सरस’ का दुग्ध संकलन और विपणन विगत वर्षों की तुलना में भारी गिरावट का शिकार है। जिला दुग्ध संघों में योग्य टेक्नोक्रेट की जगह अपने पसंदीदा बाबुओं को MD/प्रशासक लगाकर संस्था को निजी आय का साधन बना लिया गया है। दिल्ली जैसे देश के सबसे महत्वपूर्ण और बड़े बाजार में सरस दुग्ध उत्पादों के विपणन में रत्तीभर भी वृद्धि नहीं हुई है, जबकि राजस्थान की अपनी धरती पर अमूल और मदर डेयरी के प्लांट धड़ल्ले से लग रहे हैं, जो सरस ब्रांड के साथ घोर अन्याय और कुठाराघात है।
8. 3000 रिक्त पद, प्रशासनिक लापरवाही और गुणवत्ता में अवनति: वर्तमान में RCDF और प्रदेश के विभिन्न जिला संघों में लगभग 3000 पद खाली पड़े हैं। एक भी नए कर्मचारी की नियमित भर्ती नहीं की गई है, और मात्र 20% स्थायी कर्मचारियों के कंधों पर बोझ डालकर पूरा काम घसीटा जा रहा है। भारी मात्रा में रिक्त पदों और जानबूझकर बरती गई प्रशासनिक लापरवाही के चलते सरस के दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है, जो प्रतिष्ठित सरस ब्रांड को पूर्ण अवनति की गर्त में धकेल रही है।
9. बजट आवंटन में पक्षपात और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हनन: विभिन्न जिला संघों के बीच वित्तीय बजट के आवंटन में जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से खुला पक्षपात किया गया है। RCDF के संचालक मंडल (Board of Directors) के लोकतांत्रिक चुनाव नहीं करवाए गए हैं, और एमडी स्वयं ही प्रशासक एवं प्रबंध संचालक बनकर तानाशाही रवैये से संस्था पर काबिज हैं।
10. अध्यक्षों का अपमान और AGM नहीं बुलाना: विभिन्न जिला संघों के निर्वाचित अध्यक्षों द्वारा बार-बार लिखित नोटिस और मांग करने के बावजूद आमसभा (AGM) की एक भी बैठक नहीं बुलाई गई। इसके उलट, जिला संघों के निर्वाचित अध्यक्षों के साथ बेहद अप्रजातांत्रिक और अपमानजनक व्यवहार किया जाता है।
11. जन-कल्याणकारी योजनाओं में विफलता: ‘मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना’ के तहत मिलने वाली 5 रुपए प्रति लीटर अनुदान राशि दुग्ध उत्पादकों को कभी भी समय पर वितरित नहीं की गई। इसी प्रकार, ‘मिड-डे मील’ (Mid-day Meal) की करोड़ों रुपए की बकाया राशि का भुगतान भी पिछले एक वर्ष से लंबित पड़ा हुआ है, जिससे पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।
निष्कर्ष एवं मांग
अजमेर डेयरी अध्यक्ष, डेयरी अधिकारी-कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन और प्रदेश के लाखों पशुपालकों व किसानों की ओर से राज्य सरकार को स्पष्ट चेताया गया है कि यदि वर्तमान एमडी को इन गंभीर अनियमितताओं के बावजूद संरक्षण दिया गया, तो ‘सरस’ ब्रांड और प्रदेश के लाखों पशुपालक पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे।
अतः आपसे करबद्ध एवं पुरजोर आग्रह है कि इस अत्यंत गंभीर प्रकरण का संज्ञान लेते हुए:
1. श्रीमती श्रुति भारद्वाज की पुनर्नियुक्ति/सेवा विस्तार के औचित्य की तत्काल समीक्षा की जाए।
2. उनके पिछले कार्यकाल के दौरान हुए ईआरपी घोटाले, पशु आहार टेंडर घोटालों, वित्तीय अनियमितताओं और भूमि हड़पने के आरोपों की उच्च स्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच करवाई जाए।
3. RCDF और जिला दुग्ध संघों को तानाशाही मुक्त कर ‘सरस’ ब्रांड एवं पशुपालकों के हितों की रक्षा की जाए।