नाथद्वारा। (हर्षवर्धन जोशी) समीपवर्ती मंडीयाना गांव के 12 वर्षीय बालक में अत्यंत दुर्लभ जिनर सिंड्रोम का सफल ऑपरेशन कर नाथद्वारा के यूरोलॉजिस्ट डॉ, अर्पित शर्मा एवं उनके पिता डॉ, आर पी शर्मा ने चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। यह बीमारी विश्वभर में बेहद दुर्लभ मानी जाती है। चिकित्सा साहित्य के अनुसार अब तक इसके लगभग दुनिया के 280 मामले ही ज्ञात हुए हैं, जिनमें से इनमें से करीब 128 मरीजों की सर्जरी की जा चुकी है। डॉ. अर्पित शर्मा ने बताया कि यह जन्मजात विकार गर्भावस्था के दौरान लगभग 13 वें सप्ताह में भ्रूण के विकास के दौरान उत्पन्न होता है। इसका पहला वैज्ञानिक वर्णन वर्ष 1914 में किया गया था। इस बीमारी में मूत्राशय के पीछे असामान्य सिस्ट ( गांठ) बन जाती है जो मूत्र मार्ग, मलत्याग और आसपास की रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालकर गंभीर परेशानी पैदा कर सकती है। बालक कब्ज की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचा था, जांच के दौरान उसके मूत्राशय के पीछे 12 गुना 9 सेंटीमीटर की विशाल गांठ का पता चला ।सर्जरी की शुरुआत दूरबीन तकनीक से की गई, लेकिन गांठ के आसपास अत्यधिक चिपकाव होने के कारण चीरा लगाकर ऑपरेशन करना पड़ा। करीब ढाई घंटे की जटिल सर्जरी के बाद गांठ को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मजदूरी कर परिवार चलाने वाले गरीब माता-पिता के इस बच्चे का नाथद्वारा जैसे छोटे शहर में इतनी जटिल और दुर्लभ सर्जरी सफल होना स्थानीय चिकित्सा सेवाओं की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ज्ञात रहे कि डॉक्टर अर्पित ने पूर्व में भी कई दुर्लभ व जटिल रोग ग्रस्त मरीजों के सफल ऑपरेशन कर उन्हें राहत पहुंचाई है।