डीएसपी म्यूचुअल फंड ने निवेशकों से की अपील, मल्टी एसेट फंड चुनने के तरीके पर दोबारा विचार करें

मुंबई, अगस्त, 2026। डीएसपी म्यूचुअल फंड ने मल्टी एसेट एलोकेशन श्रेणी के लिए एक नया डिजिटल केंपेन शुरू किया है। इसका उद्देश्य निवेशकों को हाल में मिले रिटर्न से आगे बढ़कर यह समझ बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है कि इन फंडों की किसी निवेश पोर्टफोलियो में क्या भूमिका होती है।

यह अभियान इस आकलन पर आधारित है कि मल्टी एसेट एलोकेशन फंडों में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी जरूर है, लेकिन कई निवेशक अपनी पड़ताल की शुरुआत इस श्रेणी से जुड़ी अलग-अलग उम्मीदों के साथ करते हैं कि आखिर ये फंड किस तरह का लाभ देने के लिए बनाए गए हैं। एम्फी (AMFI) के अनुसार, जनवरी-मार्च 2026 तिमाही के दौरान इक्विटी-आधारित स्कीम में हुए कुल शुद्ध निवेश (नेट इनफ्लो) में मल्टी एसेट एलोकेशन फंडों की हिस्सेदारी 27% रही। यह पिछली तिमाही में 21% और पिछले वर्ष की इसी अवधि में केवल 6% थी। डीएसपी म्यूचुअल फंड में भी इस वर्ष मल्टी एसेट एलोकेशन फंडों में लेन-देन करने वाले निवेशकों की संख्या पिछले साल के मुकाबले तीन गुना बढ़ गई है।

जैसे-जैसे निवेशकों की भागीदारी बढ़ी, डीएसपी ने देखा कि कई निवेशक इस श्रेणी का मूल्यांकन मुख्य रूप से हालिया रिटर्न के आधार पर कर रहे थे। वे पहले यह समझने की कोशिश नहीं कर रहे थे कि मल्टी एसेट एलोकेशन फंड आखिर होते क्यों हैं। इससे निवेशकों की अपेक्षाएं इन फंडों की वास्तविक भूमिका से मेल नहीं खातीं। बाजार की परिस्थितियां बदलने पर उनके निराश होने या समय से पहले निवेश से बाहर निकलने की संभावना बढ़ जाती है।

यह समझने के लिए कि निवेशक इस श्रेणी को किस तरह देखते हैं, डीएसपी ने निवेशकों द्वारा किए गए 100 से अधिक सर्च प्रश्नों का विश्लेषण किया। सवाल अलग-अलग थे, लेकिन व्यापक रूप से वे दो अलग-अलग सोच को दर्शाते थे।

पहला, जिसे डीएसपी ने ‘रिटर्न सीकर्स’  नाम दिया। मल्टी एसेट एलोकेशन फंडों को मुख्य रूप से हालिया प्रदर्शन के नजरिए से देखता था। उनके सवाल रिटर्न, रैंकिंग और मौजूदा बाजार परिस्थितियों के आधार पर इस श्रेणी के फंड में निवेश करना “फायदेमंद है या नहीं” जैसे विषयों पर केंद्रित थे। दूसरा समूह, जिसे ‘डाइवर्सिफायर्स’  कहा गया, इस श्रेणी को अलग नजरिए से देखता था। उनके सवाल पोर्टफोलियो बनाने, उसमें विविधता विविधीकरण (डाइवर्सिफिकेशन) लाने, एसेट एलोकेशन और अलग-अलग बाजार चक्रों में मल्टी एसेट एलोकेशन फंड किस तरह मदद कर सकते हैं, इस समझ पर आधारित थे।

यह समझने के बाद कि दोनों तरह के निवेशक अलग-अलग जवाब तलाश रहे हैं, डीएसपी ने इस अभियान को दोनों सोच के अनुरूप तैयार किया। हर निवेशक को एक जैसा संदेश देने के बजाय फंड हाउस का यह अभियान उन्हें उनकी सर्च की मंशा के आधार पर अलग-अलग सामग्री तक पहुंचाता है। इसमें जो निवेशक रिटर्न पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, उन्हें निवेश से पहले इस श्रेणी की भूमिका और उससे जुड़ी अपेक्षाओं को समझने के लिए प्रेरित किया जाता है। विविधता को समझने वाले निवेशकों को यह बताया जाता है कि किस प्रकार अलग-अलग एसेट क्लास मिलकर अधिक मजबूत और टिकाऊ निवेश पोर्टफोलियो बनाने में मदद करते हैं।

इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग किया गया है। इसकी मदद से  निवेशकों के सर्च व्यवहार का विश्लेषण करने और बड़े पैमाने पर उनके सवालों को व्यवस्थित करने में किया गया। इससे  यह अभियान अलग-अलग निवेशकों की जरूरतों के अनुरूप अधिक सार्थक तरीके से जवाब दे सके। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह था कि निवेशकों के उन्हीं सवालों का जवाब देना, जो वे वास्तव में पूछ रहे हैं, न कि यह मान लेना कि हर निवेशक को एक जैसी जानकारी चाहिए।

यह अभियान डिजिटल सर्च, महानगरों और देश के शीर्ष 20 शहरों में डिस्प्ले विज्ञापनों, सोशल मीडिया तथा ऑडियो प्लेटफॉर्म पर चलाया जाएगा। इनमें गूगल, मेटा, लिंक्डइन, एक्स, स्पॉटिफाई, रेड एफएम, रेडिट, टिकरटेप और क्रेड जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इसका उद्देश्य निवेशकों को उस समय से एकीकृत अनुभव उपलब्ध कराना है, जब वे इस श्रेणी के बारे में जानकारी जुटाना शुरू करते हैं।

अभियान पर टिप्पणी करते हुए डीएसपी म्यूचुअल फंड में हेड (डायरेक्ट एंड इंस्टीट्यूशनल मार्केटिंग) मनीष राठी ने कहा, “जब हमने यह विश्लेषण किया कि निवेशक मल्टी एसेट एलोकेशन फंडों के बारे में किस तरह सर्च कर रहे हैं, तो हमें पता चला कि सभी निवेशक एक जैसा जवाब नहीं खोज रहे थे। कुछ लोग हालिया रिटर्न का मूल्यांकन कर रहे थे।  कुछ यह समझना चाहते थे कि यह मल्टी असेट क्लास उनके निवेश पोर्टफोलियो में किस तरह शामिल हो सकती है। हर किसी से एक जैसी बात करने के बजाय, हम चाहते थे कि हमारा संवाद उनके अलग-अलग शुरुआती नजरिए पर केंद्रित रहे। यह अभियान निवेशकों को बेहतर सवाल पूछने और यह समझने में मदद करता है कि मल्टी एसेट एलोकेशन फंड वास्तव में किस उद्देश्य के लिए बनाए गए हैं तथा उनसे क्या यथार्थवादी अपेक्षाएं रखी जानी चाहिए। इसी से यह माना जाएगा कि यह अभियान अपने उद्देश्य में सफल रहा। .”

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