*क्या “उपमहापौर का पद लालीपोप* तो नहीं?*

भीलवाड़ा। पटरी के पार के नेता अपना उप महापौर बनाकर *यश चोपड़ा की प्रसिद्ध फिल्म *दीवार* के क्लाइमेक्स के संवाद की याद ताजा कर रहे है।जिसमें अमिताभ बच्चन पहली बार मंदिर में जाकर कहते है *आज खुश तो बहुत होंगे तुम* संवाद बोलते हैं। यही कोठारी साब का खेमा उप महापौर बनाकर अपनी कमीज़ के बाहें ऊपर चढ़ा कर फिर रहे हैं। लो भाई हमने अपना उप महापौर बनाकर मैदान मार लिया। यहां भी *मेवाड़ के स्वयं भूं मोदी मात खा गए*। हालांकि वो कपड़ा व्यवसाई को उप महापौर बनाकर सीना तान रहे हैं।
अब जरा उप महापौर के लिए कैसे घटना क्रम चला। उस पर नजर डालें। कोठारी साब ने अपने राइट हेड राधेश्याम सोमानी का नाम किसी भाजपा के माध्यम से पेश करवा उनका विधानसभा में साथ देने का कर्ज उतारने का प्रयास किया।उनका तुरूप का पत्ता काम कर गया। क्योंकि महापौर में कोठारी साब ने मेवाड़ा के प्रत्याशी के नाम पर बिना हिचकिचाए मुहर लगा दी। हालांकि उप महापौर के लिए मेवाड़ के स्वयं भूं मोदी फिर *सुमन ओझा* पर दांव खेलना चाहते थे लेकिन सोमानी का नाम आते ही वो अपने कपड़ा व्यवसाई से जुड़े साथी के नाम पर ना नुक नहीं कर सके। उधर मेवाड़ा रमेश खोईवाल को उप महापौर बनाना चाहते थे। लेकिन पार्षद चुनाव में पति-पत्नी के जीत जाने और खोईवाल के मंडल अध्यक्ष होने के कारण मेवाड़ा ने कोठारी के साथ जाना ही बेहतर समझा। वहीं विट्ठल दादा *शंकर जाट* को बनाना चाहते थे। लेकिन यहां महापौर का राजपूत होना और जाट के उप महापौर बनने से जातीय समीकरण नहीं बैठ रहे थे। इसलिए दादा ने भी दूरदृष्टि का परिचय देते हुए सोमानी पर राजी हो गए।
सोमानी उप महापौर का पद पाकर फूले नहीं समा रहे हैं। अब बता दूं सोमानी को कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं हैं।वो *केवल और केवल* पार्षद की हैसियत से ही रहेंगे। जब महापौर नहीं होगी तो नियमानुसार उनका चार्ज सामान्य महिला को ही मिलेगा। सोमानी को केवल अलग से बैठने के लिए कमरा मिलेगा और अपनी कार पर
उप महापौर के नाम की *नेमप्लेट* लगा सकेंगे बस। सोमानी को उप महापौर बनाकर उनके हमदर्द नेताओं ने उनकी *कोनी पर गुड़* तो लगा दिया है। कोनी पर गुड़ लगाने का तात्पर्य समझ गए ना, वो किसी भी कीमत पर चाहकर भी कोनी पर लगे गुड़ खा नहीं सकते है।
*सुशील चौहान*
*स्वतंत्र पत्रकार*
*पूर्व उप संपादक, राजस्थान पत्रिका, भीलवाड़ा*
*वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रेस क्लब,भीलवाड़ा*