बालोतरा साहित्यिक संवाद-2026 में अनिल सक्सेना ‘ललकार’ का आह्वान
बालोतरा, 9 अगस्त। 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के अंतर्गत रविवार को वेलकम होटल, हनवंत सराय के पीछे, बालोतरा में “बालोतरा साहित्यिक संवाद-2026” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं मुख्य वक्ता 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन के संस्थापक-प्रवर्तक, वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार एवं लेखक अनिल सक्सेना ‘ललकार’ रहे। संवाद में साहित्य, संस्कृति, भारतीय ज्ञान परंपरा, युवा चेतना और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने अपने उद्बोधन में कहा, “शब्द समाज से, युवा संस्कृति से और साहित्य जनचेतना से जुड़े।” उन्होंने कहा कि साहित्य केवल पुस्तकों और आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे समाज की संवेदनाओं, सरोकारों और जनचेतना से जोड़ना आवश्यक है। युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़कर ही समाज में सकारात्मक एवं रचनात्मक परिवर्तन की मजबूत आधारशिला तैयार की जा सकती है।
कार्यक्रम में जोधपुर संभाग प्रभारी डॉ. रामकुमार जोशी, डॉ. रामेश्वरी चौधरी, शंकरलाल सलुंदिया एवं दमन त्रिपाठी मंचासीन रहे।
डॉ. रामकुमार जोशी ने कहा कि राजस्थान की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और युवाओं को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए ऐसे साहित्यिक संवाद महत्वपूर्ण हैं।
डॉ. रामेश्वरी चौधरी ने कहा कि साहित्य और संस्कृति समाज की संवेदनाओं को जीवित रखने का माध्यम हैं तथा युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
शंकरलाल सलुंदिया ने कहा कि गांवों और कस्बों में छिपी साहित्यिक एवं कलात्मक प्रतिभाओं को मंच मिलने से राजस्थान की लोक एवं साहित्यिक विरासत को नई पहचान मिलेगी।
दमन त्रिपाठी ने कहा कि साहित्यिक आयोजनों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर उन्हें भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कार और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ने के प्रयास निरंतर किए जाने चाहिए।
साहित्यकारों ने रखे विचार
संवाद में डॉ. पृथ्वीराज दवे, प्रेमसिंह खोखर, जीताराम मकवाना, अम्बालाल खत्री, दौलतराज सोनगरा, कपिल बोहरा, भीखाराम प्रजापत, प्रदीप दवे एवं हनुमंत सोनी ने साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे।
काव्य पाठ का आयोजन
कार्यक्रम में आयुषी, अशोक हुंडिया, रामप्रसाद, महेंद्र द्विवेदी, भवानी शंकर गौड़, निर्मल खरे, राजा सोनी, संजय दुबे एवं रमाकांत शर्मा ने काव्य पाठ प्रस्तुत किया। काव्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को साहित्यिक और रचनात्मक वातावरण प्रदान किया।
छात्राओं ने कार्यक्रम स्थल पर बनाए चित्र
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण स्वामी विवेकानंद राजकीय मॉडल स्कूल, पचपदरा की छात्राओं गुंजन, संतोष, साक्षी एवं प्रियंका चौधरी की रचनात्मक प्रस्तुति रही। छात्राओं ने कार्यक्रम स्थल पर ही चित्र बनाकर अपनी कला प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उनकी इस रचनात्मक पहल को उपस्थित साहित्यकारों, कलाकारों और अतिथियों ने सराहा।
साहित्यप्रेमियों और युवाओं की रही भागीदारी
इस अवसर पर डॉ. प्रभा जोशी, धनराज पंवार, गोपीराम, कैलाश गोस्वामी, जेठानाथ, सालगराम परिहार, मांगीलाल जीनगर, सत्यनारायण अवस्थी, मनोहरलाल, पुखराज खारवाल, प्रभा शर्मा, राधारानी शर्मा, चंचल शर्मा, ईशराराम पंवार, नारायण नेहरा, राजू जीनगर, परसाराम सराणा, महेंद्र कुमार, हेमंत कुमार दवे, माणिक चन्द्र कछावा, बागाराम पंवार, लक्ष्मण लाल, राजेन्द्र गहलोत, अनिल कुमार, घेवरचंद, सवाई परिहार, योगेश त्रिपाठी, संजना दवे, असरफ अली एवं दिलीप कुमार सहित बड़ी संख्या में युवा, छात्र, साहित्यकार, लेखक, बुद्धिजीवी एवं कलाकार उपस्थित रहे।
सामूहिक शपथ के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में अनिल सक्सेना ‘ललकार’ ने साहित्य, संस्कृति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण तथा युवा पीढ़ी को इनसे जोड़ने की सामूहिक शपथ दिलाई। उपस्थित लोगों ने शपथ को दोहराते हुए साहित्य और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन तथा नई पीढ़ी तक भारतीय ज्ञान परंपरा को पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
बालोतरा साहित्यिक संवाद-2026 को 21वीं सदी के राजस्थान साहित्यिक आंदोलन की राज्यव्यापी गतिविधियों की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आयोजित किया गया। संवाद के माध्यम से स्थानीय साहित्यकारों, रचनाकारों, कलाकारों और युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ शब्दों को समाज से, युवाओं को संस्कृति से और साहित्य को जनचेतना से जोड़ने का संदेश दिया गया।
अशोक लोढा
प्रदेश महासचिव
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