त्रिसुगंधि साहित्य, कला एवं संस्कृति संस्थान का एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन एवं सम्मान समारोह संपन्न

16 जिलों के साहित्यकारों की सहभागिता, लगभग 150 साहित्यकार रहे उपस्थित; 17 साहित्यकार सम्मानित और 8 पुस्तकों का विमोचन
उदयपुर। त्रिसुगंधि साहित्य, कला एवं संस्कृति संस्थान, उदयपुर की ओर से एक दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन एवं सम्मान समारोह, पुस्तक विमोचन, साहित्यिक परिचर्चा एवं पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन 9 अगस्त 2026 को श्रृंगी ऋषि भवन, अम्बामाता स्कीम, उदयपुर में किया गया। प्रातः 9:30 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक छह सत्रों में विभाजित यह आयोजन पूरे दिन साहित्यप्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। कार्यक्रम में लगभग 150 साहित्यकार पूरे दिन उपस्थित रहे तथा राजस्थान के 16 जिलों से साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों ने सहभागिता की। दिल्ली सहित अन्य स्थानों पर रह रहे प्रवासी राजस्थानियों का भी सम्मान किया गया।
संस्थान की संस्थापक-अध्यक्ष आशा पाण्डेय ओझा ‘आशा’ एवं महासचिव संजय गुप्ता ‘देवेश’ ने बताया कि अधिवेशन का उद्देश्य साहित्यकारों को सम्मानित करने के साथ साहित्य की विभिन्न विधाओं, समकालीन विषयों और सामाजिक सरोकारों पर सार्थक संवाद स्थापित करना है। राजस्थान के विभिन्न जिलों से साहित्यकारों की सहभागिता तथा प्रवासी राजस्थानियों की उपस्थिति ने आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान किया।
उद्घाटन सत्र में पांच साहित्यकार सम्मानित
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि धर्म नारायण जोशी, अध्यक्ष राधेश्याम सिखवाल, उद्यमी एवं समाजसेवी, विशिष्ट अतिथि जितेन्द्र कुमार पाण्डेय, मुख्य निष्पादन अधिकारी, श्रीनाथजी मंदिर मंडल, नाथद्वारा, तथा साहित्यकार राजेन्द्र शर्मा ‘मुसाफिर’, वरिष्ठ साहित्यकार, चूरू रहे। अरुण जोशी एवं मनोहर सिखवाल की भी उपस्थिति रही। संस्थापक-अध्यक्ष आशा पाण्डेय ओझा ‘आशा’ एवं महासचिव संजय गुप्ता ‘देवेश’ का सानिध्य रहा।
इस सत्र में डॉ. उमेश चौरसिया, अजमेर को ‘महिमा आमेटा ओव्यूं लोक-भाषा साहित्य-शिखर सम्मान-2026’, विजय जोशी, कोटा को ‘दुर्गादेवी स्मृति हिंदी साहित्य विभूषण सम्मान’, रतनलाल मेनारिया ‘नीर’, चित्तौड़गढ़ को ‘हेमलता अग्रवाल स्मृति कथा-साहित्य गौरव सम्मान’, श्रीमती शकुंतला पालीवाल को ‘सुश्री गीता वर्मा स्मृति युवा-रत्न लेखन सम्मान’ तथा प्रदाता डॉ. अंजीव अंजुम, दौसा को ‘रतनलाल शर्मा ‘सिखवाल’ अजमेर स्मृति काव्य-कथ्य गौरव सम्मान’ प्रदान किया गया।
इसी सत्र में स्व. ज्ञानेश्वरी चौहान, जोधपुर के काव्य-संग्रह ‘जिजीविषा’ तथा रमेश भटनागर, उदयपुर की पुस्तक ‘पपीहा मुँह खोलेगा तो…’ का विमोचन हुआ। सुभाष अग्रवाल और डॉ. प्रियंका भट्ट ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से साहित्य की विभिन्न विधाओं को मंच प्रदान करने का प्रयास किया गया।
द्वितीय सत्र में ‘आदिवासी जनजातियाँ एवं राष्ट्रवाद’ पर परिचर्चा
द्वितीय सत्र में ‘आदिवासी जनजातियाँ एवं राष्ट्रवाद’ विषय पर परिचर्चा हुई। मुख्य वक्ता डॉ. सुरेश सालवी, विभागाध्यक्ष, राजस्थानी विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर तथा अध्यक्ष डॉ. आशीष सिसोदिया, विभागाध्यक्ष, उर्दू विभाग, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर रहे। मुख्य अतिथि प्रहलाद पारीक, भीलवाड़ा, विशिष्ट अतिथि श्री विजय जोशी, कोटा, डॉ. अनंत सिंह, फालना एवं श्री के.के. शर्मा, अजमेर रहे। सानिध्य श्री हेमेंद्र सिंह चावंड, उदयपुर एवं श्री लोकेश पारख, उदयपुर का रहा।
इस सत्र में श्री नाथूसिंह इंदा, खिरजा खास बालेसर को ‘कृष्ण चंद्र ओझा ‘ओसियां’ स्मृति बाल साहित्य-रत्न सम्मान’, घनश्याम किनियां को ‘राजकुमार गुप्ता स्मृति छंद-रत्न सम्मान-2026’, ऋतु चतुर्वेदी, भीलवाड़ा को ‘अशोक कुमार सक्सेना स्मृति भारतीय अध्यात्म-दर्शन विभूषण सम्मान’ तथा रश्मि शर्मा, कोटा/उदयपुर को ‘सुश्री सुरभि स्मृति साहित्य-सौरभ सम्मान’ प्रदान किया गया।
इसी सत्र में ‘बारिश में भीगे शब्द’, लेखक चंद्रशेखर शर्मा, नारलाई, तथा ‘आशाओं के पंख’, लेखक सुनील चाष्टा, सलूंबर की पुस्तकों का विमोचन हुआ।
तृतीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. भैरूंलाल गर्ग, वरिष्ठ साहित्यकार एवं संपादक ‘बालवाटिका’, भीलवाड़ा ने की। उन्होंने राष्ट्रवाद,संस्कार, संस्कृति व बाल साहित्य पर मुख्य वक्ता के तौर पर अपनी बात रखी ।विशिष्ट अतिथि डॉ. सरस्वती जोशी, बनवारी शर्मा पारीक ‘नवल’, फतेहनगर तथा सानिध्य ललित पारख,लोकेश पारख का रहा।
इस सत्र में श्री श्याम मठपाल को ‘राजकुमार गुप्ता स्मृति छंद-रत्न सम्मान-2025’, श्री चंद्रशेखर शर्मा, नारलाई को ‘झंकार कुंवर-संपतराज पोरवाल स्मृति ज्योतिर्मय शांति साहित्य सम्मान’ तथा देवेन्द्र कुमार देव, सुमेरपुर-पाली को ‘मथुरादास पारख स्मृति युवा कथा-रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया।इस सत्र में आशा पाण्डेय ओझा की पुस्तक ‘तितली चली सिनेमा हॉल’ तथा डॉ. नम्रता जैन की ‘काव्य सरिता’ का विमोचन हुआ। सुनीता निमिष सिंह डॉ कामिनी व्यास रावल, तिलकेश जोशी, बाल गोपाल आवेश, डॉ चंद्र रेखा शर्मा, डॉ अंजीव अंजुम, मुकेश मारवाड़ी, डॉ पुष्पा कलाल, द्वारा विभिन्न सत्रों का संचालन किया गया। प्रमिला शरद व्यास,मदन जोशी सार्थक, डॉ प्रियंका भट्ट, मीनाक्षी पंवार, डॉ निर्मला शर्मा, आशा पांडे ओझा, रमेश भटनागर, डॉ मनीष सक्सेना, द्वारा विभिन्न पुस्तकों की समीक्षाएं प्रस्तुत की गई।
चतुर्थ सत्र में काव्य पाठ आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि श्री प्रमोद सनाढ्य, वरिष्ठ साहित्यकार, नाथद्वारा, अध्यक्ष डॉ. विजय विप्लवी, लेखक एवं स्वतंत्र पत्रकार, विशिष्ट अतिथि पुरुषोत्तम शाकद्वीपीय एवं श्री अरुण त्रिपाठी, तथा दीपक नगायच रोशन, उदयपुर रहे।
इस अवसर पर श्री बंसीलाल लोहार, लक्ष्मीलाल खटीक, सुदेश चौधरी, के.पी. राय, सुमन स्वामी, डॉ. नितिन मेनारिया, लोकेश चौबीसा, संगीता गुजराती, मधु सहगल, गति शर्मा, सोहन ढीढोर एवं चंद्रेश खत्री ने काव्य पाठ किया।इसके बाद कार्यकर्ता एवं भामाशाह अभिनंदन एवं समापन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें संस्था के कार्यकर्ताओं का तथा कार्यक्रम को सहयोग करने वाले भामाशाओं का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम के अंत में सुनीता निमिष सिंह एवं डॉ. मनीष सक्सेना ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
पूरे आयोजन में राजस्थान के विभिन्न जिलों से आए साहित्यकारों की सक्रिय सहभागिता, साहित्यिक परिचर्चा, काव्य पाठ, पुस्तक विमोचन, सम्मान समारोह एवं पुस्तक प्रदर्शनी ने राष्ट्रीय अधिवेशन को गरिमापूर्ण और सार्थक स्वरूप प्रदान किया।

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